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पिता कर्नल, बेटा 4 साल बाद लेफ्टिनेंट

7 वर्ष पहले
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आर्मीस्कूल, रांची का छात्र यशस्वी राज की उम्र अभी 17 साल है। चार साल बाद वह भारतीय थल सेना में लेफ्टिनेंट के पद पर योगदान देंगे। इनके पिता डॉ. राजेश कुमार, अभी कर्नल (सिग्नल्स) हैं। वे रांची में ही पोस्टेड हैं। राज का हाल ही में नेशनल डिफेंस एकेडमी में चयन हुआ है और उन्हें देशभर में 14वां स्थान प्राप्त हुआ है। इतना ही नहीं, राज झारखंड-बिहार के टॉपर भी हैं। देहरादून स्थित इंडियन मिलिट्री एकेडमी में आयोजित देश के अलग-अलग राज्यों के टॉपरों के सम्मान समारोह में सेंटर कमांडेंट जनरल मानवेंद्र सिंह ने हाथ मिलाया और सफलता पर बधाई दी। इस मौके की साक्षी बनीं राज की मां डॉ. अरुणिमा सिंह और छोटी बहन अंबाली।

यशस्वी राज कहते हैं, मुझे आर्मी से शुरू से ही लगाव है। आर्मी का जॉब एडवेंचरस होता है। कभी पहाड़ पर रहना, तो कभी बालू पर। हर मुश्किल और परिस्थितियों से लड़कर देशवासियों की सेवा करने का मन करता था। जो मुझे मिल गया। राज कहते हैं कि एनडीए की तीन साल की ट्रेनिंग पुणे में पूरी करूंगा। फिर एक साल देहरादून में ट्रेनिंग होगी।

देहरादून से लौटने के बाद राज ने कहा कि उन्हें इस बात का हमेशा मलाल रहेगा कि टॉप-10 में नहीं सके। लेकिन, खुशी इस बात की है कि एक अफसर के रूप में देश सेवा का मौका मिल गया है। आर्मी के प्रति बचपन से ही रुझान रहा है। पिता लद्दाख, जबलपुर, पटना, शिलांग, अंबाला समेत अन्य कई जगहों पर पोस्टेड थे। जहां भी गए वहां एडवेंचर, नए लोगों से मिलना, वहां के तौर-तरीके आदि ने काफी प्रभावित किया।

जो मन था वो मिल गया

टॉप नहीं करने का मलाल

पढ़ाई में पिता करते थे मदद

राज ने कहा कि प्लस टू के साथ-साथ एनडीए की तैयारी जारी थी। रोज रात में चार घंटे अलग से पढ़ना पड़ता था। जनरल स्टडी भी पढ़ता था। मैथ में पिता मदद करते थे। कहा कि बिना कोचिंग, ट्यूशन के खुद पर भरोसा करके तैयारी की और सफलता मिली।

यशस्वी राज