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आईवीएफ तकनीक से संतान सुख की प्राप्ति : डॉ. जयश्री

7 वर्ष पहले
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इन विट्रो फर्टिलाइजेशन (आईवीएफ) तकनीक से नि:संतान दंपती को संतान सुख प्राप्त हो सकता है। जरूरत है समय पर इलाज की। क्योंकि अधिकतर लोग इलाज के लिए इधर-उधर भटकते रहते हैं। इसमें समय भी जाया होता है और पैसा भी। ऐसे केसों को इलाज करनेवाले डॉक्टरों को भी विशेषज्ञों के पास रेफर करना चाहिए, ताकि उनका बेहतर इलाज हो सके। यह बातें डॉ. जयश्री भट्टाचार्या ने कही।

वह शनिवार को मोरहाबादी स्थित आईवीएफ सेंटर में पत्रकारों से बातचीत कर रही थीं। मौके पर कोलकाता के डॉ. दास महापात्रा मौजूद थे। मौके पर बताया गया कि सेंटर में चार दिवसीय नेशनल वर्कशॉप का आयोजन किया गया है। इसमें झारखंड, कोलकाता, बिहार समेत अन्य राज्यों के गायनीकोलॉजिस्ट, पैथोलॉजिस्ट और इंब्रोयोलॉजिस्ट शामिल हैं। इसमें आईवीएफ तकनीक के नवीनतम जानकारी साझा की जा रही है। यह भी कहा कि वैसी महिलाएं दुबारा मां बन सकती हैं, जिनका पहला बच्चा नहीं रहा। क्योंकि ये फैमिली प्लानिंग की ऑपरेशन करा चुकी होती हैं।

रॉयल कॉलेज ऑफ लंदन के इस्टर्न जोन के प्रतिनिधि डॉ. दास महापात्रा ने कहा कि बच्चेदानी में ट्यूमर होने से भी महिलाएं बांझपन की चपेट में जाती हैं। इसका इलाज है। जांच के बाद ही यह हो पाता है कि इलाज सर्जिकल है या मेडिशनल। वह शनिवार को होटल कैपिटोल हिल में आईवीएफ तकनीक पर आयोजित सिंपोजियम में बोल रहे थे। इस अवसर पर आईवीएफ सेंटर की प्रमुख डॉ. जयश्री भट्टाचार्या, डॉ. शोभा चक्रवती, डॉ. उषारानी, डॉ. उषानाथ समेत अन्य कई गायनिकॉलोजिस्ट और अन्य डॉक्टर शामिल थे। डॉ. महापात्रा आईवीएफ तकनीक की वर्तमान स्थिति और इसके मैनेजमेंट पर बोल रहे थे। डॉ. उषानाथ ने ओवेरियन कैंसर, कोलकाता के डॉ. आर चटर्जी ने सीवियर मेल इनफर्टिलिटी पर जानकारी दी।

बच्चेदानी की ट्यूमर से भी बांझपन : डॉ. महापात्रा

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