उत्पादन से जरूरी खपत : चट्टोपाध्याय
देश में स्टील इंडस्ट्रीज को बढ़ाने के लिए बुनियादी सुविधाओं पर ध्यान देने की जरूरत है। स्टील उत्पादन से ज्यादा जरूरी उसके खपत पर ध्यान देना है। ये बातें शनिवार को दुर्गापुर एलुमनाई एसोसिएशन की ओर से आयोजित इंडियन स्टील इंडस्ट्री के राष्ट्रीय सेमिनार में बेंगलुरु आईआईएसी के प्रो. डॉ. के चट्टोपाध्याय ने कही। उन्होंने कहा कि स्टील के उत्पादन को गांव-गांव, घर-घर तक पहुंचाने के लिए योजनाएं अभी से बनानी होंगी।
हमारे देश की बुनियादी संरचना में 300 मिलियन टन स्टील खपाने की जरूरत है और यह उसका सही समय है। सेट के कार्यपालक निदेशक डॉ. बीके झा ने बताया कि इस्पात की लागत को कम करने के लिए अनुसंधान करने की जरूरत है। सेट के ईडी नीरज माथुर ने मानव संसाधन के विकास पर बल देते हुए कहा कि कच्चे माल और ग्राहक की बढ़ती मांगों के साथ-साथ हमें अपने कर्मचारियों की कार्यकुशलता को भी उन्नत करना है।
स्वागत भाषण में रोलिंग मिल्स के जीएम पीपी सेनगुप्ता ने कहा कि एनआईटी दुर्गापुर आने वाले समय में भी सृजनात्मक कार्यक्रम करती रहेगी। धन्यवाद ज्ञापन मेकॉन के जीएम पीके सिन्हा ने किया।
उत्पादन के लिए परिवहन की ज्यादा जरूरत
मेकाॅनके निदेशक एस चट्टोपाध्याय ने कहा कि 300 मिलियन टन इस्पात उत्पादन के लिए मूलभूत सुविधाओं की ज्यादा जरूरत होगी। कच्चा माल आयात करने के लिए रेलवे परिवहन, बंदरगाह, रोड जैसी चीजों की ज्यादा जरूरत है। देश में इस्पात खपत की संभावनाएं ज्यादा है। एचईसी के निदेशक कुशल साहा ने बताया कि 300 मिलियन टन इस्पात उत्पादन के लिए 10 लाख करोड़ पूंजी की जरूरत है।
सेमिनार में सोविनियर का लोकार्पण करते डॉ.के.चट्टोपध्याय एवं अन्य।