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मंत्री, सांसद, विधा

7 वर्ष पहले
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आंखें खुलते ही हमारा सामना ‘सिस्टम’ से हो जाता है। अक्सर शुरू हो जाती है जिंदगी की जंग। उचक्के, दबंगई, पुलिस, ट्रैफिक, हमारे सिस्टम में ही हैं, जिससे हम रोज रूबरू होते हैं। एक बार सोचे तो सही सिस्टम हमारी परछाई तो नहीं, जिससे हम डरते हैं। फिर यह सिस्टम बदलता क्यों नहीं? क्योंकि हम इसे बदलना नहीं चाहते। बदलाव के लिए एक कदम चल कर तो देखें।


मंत्री, सांसद, विधायक को विशेष अधिकार है, इनको कुछ समझाना तो दूर, कहना भी मुश्किल है। पुलिस इनकी सुरक्षा में है। सीबीआई सरकार के आदेश में है। जनता के पास इतने अधिकार नहीं कि जब चाहे इनको वापस बुला लें। पांच साल का इंतजार करना पड़ता है। कितने दिनों बाद यह घड़ी आई है कि हम अपनी मर्जी की सुनें। शिक्षा और जानकारी की कमी लोकतंत्र को कमजोर कर रही है। सोच-समझकर अपना वोट डालंे।

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मोदी की लोकप्रियता से डर गई टाइम पत्रिका!

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बिकाऊ लोग

सिस्टम बदलता क्यों नहीं

शिक्षा और जानकारी की कमी से लोकतंत्र कमजोर