भाई साहब बताइए कहां कौन जीता...
प्रोजेक्टभवन मुख्य सचिवालय में बुधवार को सबसे बड़े साहब आज भी नहीं आए थे। कई और साहब भी नहीं दिखे। निचले तल्ले पर भवन निर्माण विभाग के सचिव जरूर बैठे थे। ऊपरी तल्ले पर अरुण बाबू भी सहकारिता का काम सलटा रहे थे। सबसे अधिक व्यस्तता नगर विकास विभाग में थी। वहां साहब भी थे और उनके सहकर्मी भी।
दूसरे विभागों की अपेक्षा यहां सरगर्मी थी। जैसे ही यह संवाददाता प्रोजेक्ट भवन पहुंचा, लंच का समय हो गया। सचिवालयकर्मी लाइन से धूप की ओर झटकते हुए जाने लगे। अलग-अलग चौकड़ी में चर्चा छिड़ गई। देखते ही चौधरी जी ने पूछा-अरे कहां थे भाई साहब। काफी दिनों से दिख नहीं रहे। अरे बताइए कौन कहां जीत रहा है। फिर तो चर्चा लंबी होती चली गई।
यह पूछने पर कि कहां के बारे में कुछ जानना चाहते हैं? सिन्हा जी ने कहा, अरे सबसे पहले हटिया का हाल बताइए। लगता है कि हटिया में भाजपा की खटिया खड़ी हो गई है। तीसरे सज्जन ने तपाक से जवाब दिया। नहीं नहीं, सिंह मोड़, बिरसा चौक आदि इलाके में तो भाजपा को खूब वोट पड़ा है। लेकिन गांव-देहात में कंघी का भी जोर जरूर दिखा। वित्त विभाग के एक सहायक ने जोड़-घटाव शुरू किया। आंकड़ा समझाने लगे। मतदाताओं के भाव बताने लगे। कहने लगे, जो लोग कंघी-कंघी कर के अंदर गया वह भी वहांं ईवीएम पर कमल फूल खोज कर बटन दबा दिया। कुछ लोगों ने इसका समर्थन भी किया। भाई हमने भी यही किया। सीमा को नहीं, मोदी को वोट दिया। प|ी भी यही बोली, भले हम लोग सीमा को नहीं जानते हैं, लेकिन मोदी जी को पहचानते हैं।
इसी बीच मोहम्मद साहब भी बीच में कूद पड़े। कहने लगे, डोरंडा में तो भाई डॉ. जावेद अहमद को भी अच्छा वोट मिला, लेकिन ज्यादा वोट नवीन को ही गया है। गुणा-भाग फिर शुरू। अरे यही तो खेल है।
मुसलमानों का जितना वोट जावेद साहब काटे होंगे, उतना ही भाजपा को फायदा हुआ होगा। लेकिन यही हाल तो वैश्य वोटों का भी हुआ है। भाजपा इसे अपना बपौती मानती थी, लेकिन कंघी ने तो फिर इस समुदाय का वोट खूब लिया है। बीच में एक सज्जन टपकते हुए कहते हैं, अरे छोड़ो यार सिल्ली का क्या हाल है। चर्चा तेज हो जाती है। कुमार जी बताने लगते हैं। उनका घर सिल्ली है। हम तो वोट देने क्षेत्र में गए भी थे। फिर कभी सुदेश के पक्ष में तो कभी अमित के पक्ष में तर्क के साथ चर्चा शुरू हो जाती है।