पाएं अपने शहर की ताज़ा ख़बरें और फ्री ई-पेपर

डाउनलोड करें
  • Hindi News
  • खतरनाक है गैस्ट्रिक एवं ड्यूडिनल अल्सर

खतरनाक है गैस्ट्रिक एवं ड्यूडिनल अल्सर

7 वर्ष पहले
  • कॉपी लिंक
आयुर्वेद विशेषज्ञ नागरमल मोदी सेवा सदन, रांची

> जल्दी-जल्दी खाना खाएं एवं खाली पेट रहें।

> तेज दर्द रहने पर ठंडे दूध का सेवन कर सकते हैं। चूंिक दूध अम्ल उत्तेजक है, अत: दूध का सेवन अिधक तेज दर्द में ही करें राहत मिलेगी।

> अम्ल को उदासीन करने के लिए अविपतिका चूर्ण एवं कपर्दिका भस्म का मिश्रण (1 चम्मच अविपतिका तथा 250 मिलिग्राम कपरदिका) लेने से लाभ मिलेगा।

> सुतशेखर रस 2-2 गोली तीन बार 2 माह तक लेने से अल्सर ठीक हो जाता है।

> अमलकी टे 2-2 गोली तीन बार 2 माह तक लेने से अल्सर भर जाता है।

>मानसिक तनाव को कम करें, चिंता से दूर रहें।

>भोजन करना भूलें तथा समय से करें।

>हल्का व्यायाम कर सकते हैं।

> केले का सेवन इस रोग में लाभदायक है।

> गोभी, काली मिर्च तथा बेलपतियां व्रण निरोधक का काम करती हैं।

अल्सर का आयुर्वेदिक समाधान

यह भी सच है कि अिधक अम्ल से कुछ जीवाणु मर जाते हैं, किंतु जो बच जाते हैं वे म्यूकस झिल्ली के अंदर घुस कर उस झिल्ली से चिपके रहते हैं तथा उस जगह पर और अिधक सूजन पैदा कर देते हैं। यह जीवाणु कैसे घाव की सूजन को बढ़ाते हैं इसके विषय में कुछ कहा नहीं जा सकता है। किंतु वैज्ञानिकों का कहना है कि ये जीवाणु घाव को भरने में बाधा डालते हैं। अत: जब तक जीवाणु म्यूकस झिल्ली के साथ चिपके रहें, तब तक घाव को भर पाना कठिन लगता है। स्थाई लाभ तब ही हो सकता है, जब जीवाणु का खात्मा कर दिया जाए। यदि अल्सर का उपचार ठीक से हो तो यह पेरीटोनियम को भी नुकसान पहुंचाता है, जिसके फलस्वरूप ऑपरेशन करना पड़ता है।

अल्सर एक प्रकार का उभरा हुआ तथा सूजा हुआ मांस है, जो अमाशय तथा ग्रहणी की झिल्ली में होता है। जब भोजन इससे जाता है, तो अम्ल इसे भिगो देता है। जिसके कारण म्यूकस झिल्ली गीली हो जाती है। अम्ल प्रोटीन को पचाने वाली एंजाइम पेपसिन को क्रियाशील कर देता है और यह दोनों मिलकर अमाशय एवं ग्रहणी की दीवार को खुरचना शुरू कर देते हैं। यदि झिल्ली स्वस्थ है तो उसे किसी प्रकार का नुकसान नहीं होता है और नहीं तो व्रण बन जाते हैं और इसमें जीवाणु के संक्रमण से ये और गंभीर हो जाते हैं।

इलाज नहीं होने पर ऑपरेशन होता है जरूरी

अमाशय तथा ग्रहणी की झिल्ली में होता है

खाने-पीने पर ध्यान देकर दूर रह सकते हैं

अधिकशराब का सेवन, तले हुए मसालेदार खाना लेना, अिधक उपवास, अिधक च