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संघ ने सरकार पर बढ़ाया दबाव

7 वर्ष पहले
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झारखंडसचिवालय सेवा संघ ने पांच सूत्री मांगों को लेकर सरकार पर दबाव बनाने का फैसला किया है। रविवार को हुई संघ की आमसभा में इस पर सहमित बनी। बैठक में पहले सरकार से मांगों की पूर्ति के लिए अनुरोध करने का निर्णय लिया गया। विचार नहीं करने पर आंदोलन की भी चेतावनी दी गई। वक्ताओं ने कहा कि सचिवालय सेवा के साथ अन्याय नहीं होने दिया जाएगा। इसके लिए संघ जहां तक होगा जाएगा। बैठक की अध्यक्षता अध्यक्ष ब्रजेंद्र हेंब्रम ने की। महासचिव ध्रुव प्रसाद ने विशेष रूप से अपने विचार रखे। संचालन अजय राय ने किया। मौके पर अविनाश चंद्र ठाकुर, संजय शरण और बसंतु आदि उपस्थित थे।

> झारखंड सचिवालय सेवा के लिए सचिवालय में उप सचिव के 110 एवं संयुक्त सचिव के 54 पद सृजित किए जाए।

> झारखंड प्रशासनिक सेवा के लिए सचिवालय में संयुक्त सचिव, विशेष सचिव, उप सचिव के पदों का नए सिरे से सृजन का विरोध किया गया। कहा गया कि यह सेवा एग्जिक्यूटिव बॉडी है। सचिवालय में इनके लिए इतने पदों का सृजन कहीं से उचित नहीं है।

> नव नियुक्त सहायकों को टंकन एवं कंप्यूटर परीक्षा के नाम पर वेतन वृद्धि रोकने की साजिश की जा रही है, जिस पर कार्मिक एवं सदस्य राजस्व पर्षद ध्यान दें। इस व्यवस्था को समाप्त करें।

> कैबिनेट की स्वीकृति के बाद उत्क्रमित वेतनमान को वित्त विभाग द्वारा स्थगित किए जाने का विरोध किया गया। इसको लेकर आंदोलनरत शिक्षकों का नैतिक समर्थन किया गया।

> प्रोन्नति हेतु निर्धारित कालावधि में संशोधन का विरोध किया गया। हाईकोर्ट के निर्णय के अनुरूप ही कालावधि को बनाये रखने की मांग दुहरायी गयी। कहा गया कि सचिवालय में सहायक के 600 पद अभी भी रिक्त हैं। फिर भी नियुक्त के लिए अवर सेवा चयन पर्षद को मात्र 104 पदों की अनुशंसा की गयी है।

पांच प्रमुख मांगें