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हर महीने हो रहा करोड़ों का मटका

7 वर्ष पहले
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शहरके सभी थाना प्रभारी कहते हैं कि मेरे क्षेत्र में मटका और जुआ नहीं होता। लेकिन मटका किंग विजय सिंह सहित दर्जनभर लोगों की गिरफ्तारी ने साबित कर दिया है कि शहर में मटके का खेल खुलेआम होता है। रोज करोड़ों के दांव लगते हंै। हर क्षेत्र में मटका का काउंटर बना हुआ है। जिसकी देखरेख की जिम्मेवारी उस क्षेत्र के ही कुछ दबंग किस्म लोगों के जिम्मे होती है। काउंटर पर वही बैठता है, जो लोकल व्यक्तियों को पहचानता हो। इस खेल का हिस्सा खाकी से लेकर खादी तक पहुंचता है। तभी खुलेआम संचालित इस अवैध खेल का कोई विरोध नहीं करता। डीआईजी अपने स्तर से मटका के खिलाफ कार्रवाई नहीं करते, तो मटका बाज कभी पकड़े नहीं जाते। रांची एसएसपी ने सभी थाना प्रभारियों को मटका के खिलाफ कार्रवाई का निर्देश दिया था, मगर किसी थाना प्रभारी ने कार्रवाई के नाम पर कुछ नहीं किया।

डीजीपीऑफिस तक पहुंचता है पैसा

मटकाखेलाने वालों ने बताया कि खेल के वर्तमान भविष्य को सुरक्षित करने के लिए वे संबंधित थाने से लेकर पुलिस महानिदेशक के कार्यालय तक पेशगी पहुंचाते हैं। संबंधित थाने को खेल में कोई रोक टोक नहीं करने के लिए हर महीने 20 से 30 हजार रुपए पहुंचाए जाते हैं। इतना हीं नहीं पैसे पहुंचाने में थोड़ी सी भी देर क्या हुई, पुलिस वसूलने धमकती है। थाना, एसपी, एसएसपी से लेकर डीजीपी ऑफिस तक के कर्मचारी अपनी हिस्सेदारी वसूलते हैं।

फाइल फोटो

मटका के खेल में दो तरह से दांव लगाए जाते हंै। पहला दांव सिंगल नंबर पर और दूसरा जोड़ा नंबर पर। सिंगल लकी नंबर पर दस रुपए का दांव लगाने पर अगर वह नंबर शाम में खुल जाता है तो 90 रुपए मिलते हैं। यानि 80 रुपए का मुनाफा। इसी तरह जोड़ा नंबर में दस रुपए का दांव लगाने पर अगर लकी नंबर खुला तो 800 रुपए आपके। यानि 790 रुपए का मुनाफा। इसी लालच में रोजाना शहर के सैकड़ों लोग मटका में लाखों रुपए लगाते हैं।

मटका का यह अवैध खेल बेरोक-टोक इसीलिए फल-फूल रहा है, क्योंकि सबके हिस्से बंटे हुए हैं। इसमें जो सेंटर पर सौ रुपए का दांव काटता है उसे आठ रुपए, शाम में जो लकी नंबर का पैसा पहुंचाने जाता है उसे 100 रुपए पर दस रुपए दिए जाते हैं। पैसे की बांट ईमानदारी के साथ की जाती है।

दो तरह के लगते है दांव

किसको कितना हिस्सा

करोड़पति बने खाकपति

मटकाखेल से करोड़पति बनने के चक्कर में कई परिवार सड़क पर गए। रातू क