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रांची दूरदर्शन के स्थापना दिवस पर \"चलु घुमे देस नागपुरे\" लोक संध्या आयोजित

7 वर्ष पहले
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लोक की लय पर गूंज उठा संगीत

झारखंडकी चहकती हरियाली, नदी का कलकल, तो कहीं पहाड़ों के अटल विश्वास का दृश्य बुधवार को दूरदर्शन परिसर में संगीत में उभरकर सामने आया। अवसर था दूरदर्शन के स्थापना दिवस पर झारखंडी लोक गीत-संगीत से सजे चलु घुमे देस नागपुरे लोक संध्या के आयोजन का। इसमें नामी कलाकारों ने गीत-संगीत की मन मोहक झिलमिलाहट पेश की, जो महज देखने में, बल्कि सुनने में भी मधुर था।

सांस्कृतिक कार्यक्रम की शुरुआत भूपेश कुमार और साथियों ने दूरदर्शन स्थापना गीत से की। इसके बाद बंदी उरांव साथियों ने आकर्षक कलश नृत्य प्रस्तुत किया। कमलेश गोप के खोरठा लोक नृत्य अरुण राम साथियों की नृत्य नाटिका पापा की चिट्ठी को खूब सराहना मिली। कार्यक्रम में आजाद अंसारी और साथियों ने नागपुरी गीत, इंद्रजीत कुमार ने चलू नीजक घरे नृत्य नाटिका, दिनेश कुमार ने संथाल लोक नृत्य से फिजा मनमोहक बनाई। वहीं पाजेब ग्रुप के रेट्रो डांस ने थिरकने पर मजबूर किया।

संस्कृति को ऊंचाई दे रहा केंद्र: केसरी

कार्यक्रमका उद्घाटन मुख्य अतिथि प्रख्यात साहित्यकार डॉ. विशेश्वर प्रसाद केसरी अौर डॉ. फादर एमानुएल बाखला ने दीप जलाकर किया। इस मौके पर दूरदर्शन के उप महानिदेशक डॉ. शैलेश पंडित, उप निदेशक चंद्रशेखर और प्रमोद कुमार झा उपस्थित थे। मौके पर डॉ. केसरी ने कहा कि रांची का दूरदर्शन केंद्र झारखंडी भाषा साहित्य को नई ऊंचाइयां प्रदान करने में महत्वपूर्ण भूमिका अदा कर रहा है। डॉ. स्व. रामदयाल मुंडा हमेशा कहा करते थे झारखंडी भाषा साहित्य में जो बारीकियां हैं, वो किसी अन्य भाषा साहित्य में नहीं है। डॉ. इमानुएल बाखला ने कहा कि झारखंड संस्कृति और भाषा का प्रदेश है। दूरदर्शन इसके विकास में महती भूमिका निभा रहा है।

दूरदर्शन की स्थापना 15 सितंबर 1959 को दिल्ली केंद्र के प्रथम प्रसारण से हुई। बाद में 1972 में दूरदर्शन केंद्र मुंबई से दूसरा प्रसारण प्रारंभ हुआ। इसके बाद सन 1982 से एशियाई खेलों के साथ दूरदर्शन का रंगीन प्रसारण शुरू किया गया। अनेक चैनलों एवं केंद्रों के प्रसारण के साथ वर्ष 2009 में दूरदर्शन ने अपना स्वर्ण जयंती वर्ष मनाया। दूरदर्शन देश के कोने-कोने में सुदूर गांवों तक फैला हुआ विश्व का सबसे बड़ा प्रसारण माध्यम है।

1959 में शुरू हुआ था पहला प्रसारण

स्थापना दिवस समारोह में झारखंड के लेखक, कवियों, गायकों और