प्रेस-पुलिस लिख पुलिस को देते हैं धोखा
राजधानीमें प्रेस पुलिस के नाम पर पुलिस को सरे-राह धोखा दिया जा रहा है। इस खेल का खुलासा तब हुआ, जब गुरुवार को पुलिस सुजाता चौक पर वाहन जांच कर रही थी। दिन के सवा दो बजे ओवरब्रिज से सुजाता चौक की ओर रांग साइड रहे एक मालवाहक ऑटो को पुलिस रुकने का इशारा करती है। पुलिस ने ड्राइवर से वाहन के कागजात मांगे। ड्राइवर राजू कागज दिखाने की बजाए पुलिस पर ही रौब जमाने लगा। बताया कि यह प्रेस की गाड़ी है।
कौन प्रेस पूछने पर राजू ने मोबाइल निकालकर पुलिस को पकड़ा दिया। उधर से एक अखबार का नाम लेते हुए बताया गया कि वह सीनियर क्राइम रिपोर्टर शंभु यादव है। पुलिस ने जब जांच की, तो पता चला कि इस नाम का कोई आदमी उस अखबार में नहीं था। प्रेस के नाम पर फर्जीवाड़ा कर पुलिस को चकमा देने की कोशिश करने वाले ऑटो को जब्त कर पुलिस ने चुटिया थाना के हवाले कर दिया।
420 का मुकदमा दर्ज होना चाहिए
किसीभी गाड़ी में प्रेस और पुलिस लिखकर चलना गैरकानूनी है। यह एमवी एक्ट की धारा का सरासर उल्लंघन है। कोई यदि गाड़ी पर फर्जी तरीके से ऐसा लिख कर चलता है तो उसके खिलाफ केस दर्ज होना चाहिए।\\\'\\\' राजीवरंजन, चेयरमैन, बारकाउंसिल
कार्ड मांगने पर बगलें झांकता युवक।
फर्जी प्रेस लिखा मानवाधिकार कर्मी।
जांच कर कड़ी कार्रवाई की जाएगी
वाहनपर फर्जी तरीके से प्रेस या पुलिस लिखकर पुलिस को चकमा देनेवालों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी। यह कानूनन अपराध है। इस मामले में जल्द ही एक टीम गठित कर चौक-चौराहों पर अभियान चलाकर जांच की जाएगी।\\\'\\\' राजेंद्रकुमार चौधरी, ट्रैफिकडीएसपी
फर्जी पुलिस लिखी बाइक भी धराई
पुलिसने दो बाइक सवारों पंकज कुमार और कुंदन कुमार को पकड़ा। दोनों की बाइक पर पुलिस लिखा हुआ था। पुलिस ने दोनों से कागजात मांगे तो दोनों पुलिस पर भड़क गए। एक ने बताया कि उसके चचेरे भाई सुजीत कुमार कोबरा बटालियन में जवान हंै। दूसरे की दलील थी कि पटना में रहने वाला उसका मौसेरा भाई पुलिस में है। इसके बाद दोनों को ट्रैफिक पुलिस ने पकड़कर चुटिया थाना के हवाले कर दिया।
मानवाधिकार कार्यकर्ता बना प्रेसकर्मी
चेकिंगके दौरान एक बाइक सवार मनोज कुमार को ट्रैफिक पुलिस ने पकड़ा। उसकी बाइक पर बड़े अक्षरों में प्रेस लिखा था। पूछताछ में बताया कि वह मानवाधिकार कार्यकर्ता है। कहा कि उसके बॉस सुनील कुमार ने गाड़ी पर प्रेस लिखाकर चलने का