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भारतीय ओलिंपिक संघ के पूर्व निदेशक जांच के घेरे में

7 वर्ष पहले
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भारतीयओलिंपिक संघ के पूर्व निदेशक एएसवी प्रसाद निगरानी जांच के घेरे में गए हैं। उनके खिलाफ निगरानी को साक्ष्य मिले हैं। संभव है कि 15 दिसंबर को पूछताछ के बाद उन्हें हिरासत में ले लिया जाए। अब तक की जांच में प्रसाद के खिलाफ निगरानी को जो सबूत मिले हैं, उस आधार पर उनके खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।

जांच और कई लोगों से पूछताछ के बाद यह स्पष्ट हुआ है कि 34वें नेशनल गेम्स के आयोजन के लिए पूर्व निदेशक ने ही अपने पैड का उपयोग कर खेल सूची भेजी थी। उस सूची में प्रसाद का हस्ताक्षर भी है। सूची में 100 से अधिक खेल सामग्री के साथ उन कंपनियों के भी नाम लिखे हुए हैं, जिनसे खरीदारी की गई। उसी सूची के अनुसार एनजीआेसी ने चुनिंदा कंपनियों से खेल सामग्री उपकरणों की खरीदारी की। संघ की पर्चेज कमेटी के तत्कालीन चेयरमैन ललित भनोट और संघ के पूर्व चेयरमैन सुरेश कलमाडी ने भी निगरानी के समक्ष पूछताछ में कहा है कि खेल सूची प्रसाद ने ही भेजी थी।

^प्रधान सचिव अलका तिवारी किसी कार्यवश मुख्यालय से बाहर हैं। उनके लौटते ही स्वीकृति दे दी जाएगी।\\\'\\\' बीसीनिगम, पीसीसीएफ(वाइल्ड लाइफ), रांची

अभियोजन की स्वीकृति नहीं मिलने पर कोर्ट मामले में संज्ञान नहीं लेगा। मामले की सुनवाई भी बाधित होने की आशंका रहती है। इस कारण सरकारी अफसर के खिलाफ मुकदमा चलाने के लिए अभियोजन की स्वीकृति जरूरी है। उल्लेखनीय है कि नेशनल गेम्स घोटाले में शामिल रहने के आरोपी पीसी मिश्र को निगरानी ब्यूरो ने अक्टूबर में गिरफ्तार किया था। गिरफ्तारी के दो दिन बाद ही निगरानी ने वन विभाग को अभियोजन की स्वीकृति के लिए पत्र लिखा था। गिरफ्तारी के 90 दिन पूरा होने से पहले निगरानी को अदालत में चार्जशीट दाखिल करना है। इसके लिए अभियोजन की स्वीकृति जरूरी है।

मुकदमा संज्ञान के लिए अभियोजन की स्वीकृति जरूरी

नेशनल गेम्स घोटाला

34वें नेशनल गेम्स घोटाले के आरोपी पीसी मिश्रा के खिलाफ निगरानी ब्यूरो को गुरुवार को भी अभियोजन की स्वीकृति नहीं मिली। जबकि तीन महीने से ब्यूरो इसके लिए वन विभाग को पत्र लिखता रहा है। एक भी पत्र का जवाब निगरानी को नहीं मिला है। गुरुवार को जांच पदाधिकारी के आदेश पर निगरानी टीम वन विभाग भेजी गई थी, लेकिन वहां टीम को बताया गया कि विभाग के प्रधान सचिव मुख्यालय में नहीं हैं। उनके कार्यालय में लौटते ही प्रक्रिया पूरी कर स्वीकृति दे