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गाय को घास खिलाने से मिलती है पितरों को तृप्ति

7 वर्ष पहले
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रांची | यदिकोई निर्धन-असहाय व्यक्ति अपने पूर्वजों का पिंडदान या श्राद्ध-कर्म करने में असमर्थ है, तो उसके द्वारा पूरी भावना श्रद्धा से गाय को घास खिलाने से भी श्राद्धकर्म का पूरा फल मिल जाता है और पितर भी तृप्त होते हैं। यह कहना है पंडित देवकुमार भट्ट का। उन्होंने बताया कि पितृपक्ष के दौरान व्यक्ति द्वारा अपने मृत पूर्वजों को श्रद्धा के साथ अर्पित की गई कोई भी वस्तु उन्हें तृप्त कर देती है। इसके लिए सिर्फ भावना होनी चाहिए। भट्ट ने इसे एक कथा के माध्यम से भी समझाया। विराट देश में एक बहुत ही गरीब व्यक्ति रहता था। पिता की श्राद्धतिथि आने पर उसके पास एक भी पैसा नहीं था। अब पिता का श्राद्ध कैसे करे, यह सोचकर उसे रुलाई आने लगी। एक विद्वान ब्राह्मण से उसने पूछा, आज मेरे पिता की श्राद्धतिथि है। और, मेरे पास पैसा भी नहीं है। अब पिता का हित कैसे करूं। इस पर ब्राह्मण ने कहा, घबराओ नहीं। पितरों के उद्देश्य से घास काटकर लाओ और गायों को खिला दो। इससे तुम्हें पिंडदान से भी अधिक फल प्राप्त होगा। यह सुन उस गरीब की जान में जान आई। उसने बड़ी श्रद्धा से गायों को चारा खिलाया। इस पुण्य के प्रभाव से उसके पितर तो तृप्त हुए ही, मरने के बाद उसे भी देवलोक प्राप्त हुआ।

देवकुमार भट्‌ट।