महासचिव बने यतींद्र प्रसाद
आईटीके उप सचिव यतींद्र प्रसाद झारखंड प्रशासनिक सेवा संघ (झासा) के तीसरी बार प्रदेश महासचिव चुने गए हैं। 2008 से महासचिव के पद पर कार्यरत यतींद्र अगले दो वर्ष तक इस पद पर बने रहेंगे। कैबिनेट के उप सचिव डी. कंडुलना प्रदेश अध्यक्ष चुने गए हैं। रविवार को होटल बीएनआर-चाणक्या के उत्सव हॉल में आयोजित झासा की विशेष आमसभा में इन पदाधिकारियों का चुनाव हुआ। चुनाव के पहले पत्रकारों से बात करते हुए यतींद्र ने कहा कि राज्य प्रशासनिक सेवा की संरचना में सुधार का निर्णय सरकार ने जल्दबाजी में नहीं, बल्कि 14 साल बाद किया। हर तीन साल पर कैडर की समीक्षा होनी चाहिए, जिसकी रिपोर्ट पर पद बढ़ाए जाने चाहिए। मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन के संज्ञान में यह बात लाने पर कैडर रिव्यू की बैठक हुई। यतींद्र ने कहा कि राज्य गठन के समय 19 विभाग थे, जो अब बढ़ कर 43 हो गए हैं। इस बीच कई जिले, अनुमंडल और निदेशालयों का गठन हुआ। ऐसे में पद तो बढ़ने ही चाहिए। यतींद्र ने दावा किया कि नियम के तहत 369 पद बढ़ने चाहिए थे, पर सिर्फ 101 पद ही बढ़े।
नए आइडियाज दें, काम में इनोवेशन लाएं : सीएस
14 साल में पहली बार बढ़े प्रशासनिक सेवाओं के पद
मुख्य सचिव सुधीर प्रसाद ने कहा कि प्रशासनिक सेवा के प्रत्येक सदस्य को पूर्व राष्ट्रपति अब्दुल कलाम की इस बात को अवश्य याद रखना चाहिए कि हम क्या दे सकते हैं। प्रशासनिक व्यवस्था की रीढ़ होने के नाते झासा के सदस्यों की जिम्मेवारी भी अधिक है। इसलिए प्रशासनिक अधिकारियों को अपनी क्षमता, ज्ञान और कार्यकुशलता को बढ़ाने की आवश्यकता है। नई सोच सामने लाएं और उसके साथ आगे बढ़ें। यदि कोई इनोवेटिव आइडिया हो तो आप सरकार को दें।
झासा की आमसभा का उदघाटन करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि उनका यह प्रयास रहा कि उन कारणों को तलाशा जाए, जिस कारण झारखंड विकास में पीछे है। सरकार ने प्रशासनिक ढांचे को बेहतर करने और पदों में वृद्धि का निर्णय लिया। राज्य प्रशासनिक ढांचे में परिवर्तन हर तीन वर्ष में होना चाहिए, पर यह 14वें साल हुआ। अनेक बैठकों में समीक्षा के क्रम में यह पाया गया कि हमारे पास पदाधिकारियों का हुजूम तो है, पर एडीएम स्तर तक पहुंचते ही अधिकतर अधिकारी रिटायर हो जाते हैं, इस स्थिति को बदलने का यह एक प्रयास है।