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मिथक को लोग इतिहास मान रहे हैं : उद््भ्रांत
वरिष्ठसाहित्यकार रमाकांत शर्मा उद््भ्रांत दो दिवसीय यात्रा पर गुरुवार को रांची पहुंचे। उद््भ्रांत मिथक को तोड़नेवाले और ऐतिहासिक पात्रों की अंतरयात्रा करनेवाले रचनाकार माने जाते हैं। वे दूरदर्शन उपमहानिदेशक के पद से रिटायर हुए पर उनका लेखन अनवरत जारी है। उन्होंने कविता, कहानी, उपन्यास, समीक्षा, अनुवाद, बाल साहित्य आदि पर 80 पुस्तकें लिखी हैं। उद््भ्रांत ने भास्कर से कई विषयों पर बातचीत की।
आपनेमिथकों पर काफी काम किया है, आपकी नजर में मिथक क्या हैं?
हमारेयहां पुराण और अन्य कथाओं में लोको श्रुति में मिथक ऐसे घुले मिले हैं कि अक्सर लोग उन्हें इतिहास का हिस्सा मानते हैं। कई बार मिथक के कारण ही पूरी कथा को नया रूप मिल जाता है। जबकि सच यह है कि मिथक इतिहास नहीं है। इसलिए मैंने जहां तक हो सका मिथकों पर काम किया है।
किन-किनपात्रों पर रचनाएं हैं?
रामकथाकी स्त्री चरित्रों के बारे में कई प्रकार की बातें प्रचलित हैं। मैंने त्रेता लिखा, इसमें रामकथा की सभी नारियों पर आपको नई दृष्टि मिलेगी। स्वयंप्रभा में स्वयंप्रभा का नया रूप मिलेगा। अभिनव पांडव में युधिष्ठिर और वक्रतुंड में गणेश के बारे में नई जानकारियां हैं।
राधामाधव की बड़ी चर्चा है, किस प्रकार की रचना है?
राधामाधव प्रबंध काव्य में मैंने राधा पर अलग दृष्टि डाली है। सबको पता है राधिका कृष्ण से बड़ी थी। मैंने उनका निर्वाण कृष्ण के बाद दिखाया है। माधव के जाने के बाद वह पूरा घटनाक्रम एक बार फिर से देखती है। इसमें पूतना, वकासुर आदि तमाम असुर जो कृष्ण प्रसंग में आएं हैं उनका विश्लेषण किया है। इस पुस्तक का अन्य भाषाओं में भी अनुवाद हुआ। लोग सराहा रहे हैं।
नयाक्या चल रहा है?
नक्सलवादपर एक उपन्यास नक्सल लिखा है। धनबाद की पत्रिका में छपा है। पुस्तक रूप में आने से पहले ही इस पर सार्थक प्रतिक्रिया मिल रही है।
उद््भ्रांत