अल्पसंख्यकस्कूल श
> स्कूलों की आधारभूत संरचना का विकास होता।
> प्रयोगशाला, लाइब्रेरी और शौचालय के लिए पैसे मिलते।
> अनुदानित के साथ-साथ गैर अनुदानित स्कूलों को भी मिलती आर्थिक मदद।
> योजना में खर्च होने वाली 75 फीसदी राशि केंद्र देती है।
> 25 फीसदी राशि विद्यालय प्रबंधन को खर्च करना है।
अल्पसंख्यकस्कूल शिक्षण संस्थानों के लिए केंद्र की महत्वाकांक्षी योजना का राज्य में बुरा हाल है। वर्ष 2009 में 11वीं पंचवर्षीय योजना के तहत इंफ्रास्ट्रक्चर डेवलपमेंट माइनॉरिटी इंस्टीट्यूट स्कीम (आईडीएमआई) देश भर में शुरू हुआ।बाद में इसे 12वीं पंचवर्षीय योजना में शामिल किया गया। योजना के तहत अल्पसंख्यक शिक्षण संस्थानों में पढ़ने वाले छात्र-छात्राओं को आधारभूत सुविधा उपलब्ध कराने के लिए केंद्र से राशि मिलनी थी। योजना के संचालन की मुख्य जिम्मेवारी मानव संसाधन विभाग की है। लेकिन अफसरों की सुस्ती के कारण आईडीएमआई योजना का लाभ चार वित्तीय वर्ष गुजर जाने के बावजूद आज तक नहीं मिला।
क्याहै योजना
आईडीएमआईयोजना के तहत अल्पसंख्यक सरकारी गैर सरकारी स्कूलों-शिक्षण संस्थानों को भवन, शौचालय, पानी, पुस्तकालय और कंप्यूटर सहित अन्य सुविधाओं के लिए प्रस्तावित खर्च में केंद्र सरकार की ओर से 75 प्रतिशत राशि दी जाती है। बाकी 25 प्रतिशत राशि संबंधित संस्थान को उपलब्ध कराना है। योजना का उद्देश्य अल्पसंख्यक संस्थानों में अवसंरचना बढ़ाकर शिक्षा में सुविधा उपलब्ध कराना है।
प्रस्ताव मांगा गया था
हमनेडीईओ से अल्पसंख्यक स्कूलों के प्रबंधन के साथ बैठक कर प्रस्ताव मांगने को कहा था। संभवत: कोई प्रस्ताव नहीं आया। इसलिए इसे आगे नहीं भेज पाए। हमारी कोशिश है कि जो भी योजनाएं हैं लागू की जाएं।
अराधनापटनायक, सचिव,शिक्षा विभाग
लापरवाह बने अफसर
योजनाके प्रचार-प्रसार में अफसरों ने पूरी तरह लापरवाही बरती है। योजना लागू कराने के नाम पर अभी सिर्फ पत्राचार ही हुआ है। योजना लागू होने से अल्पसंख्यक शिक्षण संस्थानों का डेवलपमेंट होता। स्टूडेंट्स को भी इसका लाभ मिलता।
एसअली, अध्यक्ष,झारखंड छात्र संघ
नहीं हुआ प्रचार-प्रसार
योजनाका राज्य में ढंग से प्रचार-प्रसार नहीं हुआ। इसके कारण अधिकतर शिक्षण संस्थानों को आईडीएमआई योजना की जानकारी तक नहीं है। जबकि बीते वर्ष ही निदेशालय ने सभी जिला के डीईओ को योजना के संबंध में अल्पसंख्यक स्कूलों के प्रबंधक को जानकारी देने और उनसे प्रस्ताव मांगने का निर्देश दिया था।
करोड़ों का लाभ ले चुके हैं अन्य राज्य
केंद्रकी इस योजना का लाभ दूसरे राज्य बखूबी उठा रहे हैं। करोड़ों रुपए का लाभ इन्हें मिल चुका है। लेकिन राज्य में योजना ढंग से लागू ही नहीं हुई। इसका खामियाजा राजधानी के करीब 120 अल्पसंख्यक स्कूलों और संस्थानों को भुगतना पड़ रहा है। ऐसे में राज्य भर के कितने अनुदानित और गैर अनुदानित स्कूलों को इसका फायदा होता इस बात का सहज अंदाजा लगाया जा सकता है।
माध्यमिक शिक्षा निदेशालय ने 16 जनवरी 2013 को योजना को लागू करने से संबंधित कार्रवाई के लिए भारत सरकार से विस्तृत दिशा निर्देश की मांग की थी। राष्ट्रपति शासन के दौरान राज्यपाल सचिवालय की ओर से भी योजना लागू का निर्देश एचआरडी को दिया था। अफसरों ने खानापूर्ति के लिए सभी जिला के डीईओ को अल्पसंख्यक स्कूलों और शिक्षण संस्थानों के प्रबंधकों के साथ बैठक कर प्रस्ताव मांगने के लिए पत्र लिखा था। यह प्रस्ताव डीईओ को एचआरडी को सौंपना था। दिखावे के लिए कई जिलों में डीईओ ने बैठक भी की। लेकिन योजना से संबंधित कोई प्रस्ताव आज तक नहीं मिला।
दिखावे के लिए मांगा प्रस्ताव
क्या होता लाभ
अल्पसंख्यक स्कूलों के डेवलपमेंट के लिए चल रही केंद्र की योजना का नहीं मिल रहा लाभ
अनदेखी
कागज में चल रही आईडीएमआई योजना