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पहले खुद वेतन बढ़ाया अब जांच कमेटी बैठाई

7 वर्ष पहले
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रिपोर्ट में है क्या

रिम्सके 110 दैनिक वेतन भोगी कर्मचारियों को दिए गए वेतन के संबंध में गठित जांच कमेटी ने अपनी रिपोर्ट सौंप दी है। कमेटी ने माना है कि दैनिक कर्मचारियों को बढ़ा हुआ वेतन रिम्स की स्क्रीनिंग कमेटी की अनुशंसा के आधार पर ही दिया गया था। कमेटी की अनुशंसा को रिम्स शासी परिषद की 34वीं बैठक में मंजूरी दी गई थी। बैठक में स्वास्थ्य मंत्री और स्वास्थ्य सचिव भी उपस्थित थे। शासी परिषद से अनुमति मिलने के बाद ही एक सितंबर 2013 से दैनिक कर्मचारियों को बढ़ा हुआ वेतन दिया गया, जिसपर एजी ने आपत्ति की है।

क्याहै मामला : एजीकी आपत्ति के बाद चार सितंबर को हुई रिम्स जीबी की 39वीं बैठक में पूरे मामले की जांच के लिए एक कमेटी का गठन किया गया। कमेटी में निदेशक चिकित्सा शिक्षा, रिम्स के आंतरिक वित्तीय सलाहकार और लेखा पदाधिकारी शामिल थे। कमेटी की बैठक आठ सितंबर को हुई। इसमें यह रिपोर्ट दी गई है।

परिवर्तनमहंगाई भत्ता की गणना में ही भूल : जांचकमेटी ने माना है कि अप्रैल 2008 से लेकर अप्रैल 2013 तक दैनिक कर्मचारियों को दी जाने वाली परिवर्तनशील महंगाई भत्ता के भुगतान में भूल की गई है। इस कारण 35.57 लाख रुपए का अधिक भुगतान किया गया है।

एजी ने सितंबर 2013 से रिम्स के दैनिक वेतन कर्मियों के वेतन पर आपत्ति जताई है। रिम्स जीबी की 32वीं बैठक में दैनिक कर्मियों के वेतन निर्धारण के लिए एक स्क्रीनिंग कमेटी का गठन किया गया। इसमें रिम्स के प्राध्यापक डॉ. आरके श्रीवास्तव, डॉ. विवेक कश्यप और सहायक श्रमायुक्त राजेश प्रसाद शामिल थे। कमेटी की बैठक 11 जून 2013 को हुई। इसमें वित्त विभाग के संकल्प के आधार पर कंप्यूटर ऑपरेटरों को 10,500 और दैनिक वेतन कर्मियों को पदवार कुशलता के आधार पर आनुपातिक 57.752 प्रतिशत की वृद्धि की अनुशंसा की गई। तत्कालीन निदेशक डॉ. तुलसी महतो ने इस पर सरकार की मंजूरी के लिए स्वास्थ्य विभाग के पास फाइल भेजी। स्वास्थ्य विभाग ने इस पर शासी परिषद की मंजूरी लेने का निर्देश दिया। इसके बाद जीबी की 34वीं बैठक में स्क्रीनिंग कमेटी की अनुशंसा को मंजूरी दे दी गई। बैठक में स्वास्थ्य मंत्री और स्वास्थ्य सचिव भी उपस्थित थे। अनुमित के बाद ही इसे एक सितंबर 2013 से लागू करने का निर्णय हुआ। एजी की ओर से 28.81 ऑडिट में जो आपत्तियां की गई है, वो इसी निर्णय के कारण हैं।