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हाथियों को रोकेगा ड्रेन

7 वर्ष पहले
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राजधानीसमेत राज्य के ग्रामीण इलाकों में हाथियों के हमले से हो रहे जान-माल के नुकसान को बचाने के लिए वन विभाग नई योजना पर विचार कर रहा है। हाथियों के वैसे रास्ते, जिनसे वे गांवों में प्रवेश करते हैं, उसके चारों ओर ड्रेन बनाया जाएगा। पहले चरण में तमाड़ के बारूकांडे कुरचूडीह के समीप चारों ओर ड्रेन बनाया जाएगा, ताकि हाथी जंगल से निकलकर गांवों की ओर जा सकें। वन विभाग की ओर से योजना के लिए डीपीआर तैयार किया जा रहा है। राज्य में हाथियों के हमले से हर साल दर्जनों लोगों की जानें जाती हैं। जबकि कई लोग घायल हो जाते हैं।

वाचटावर भी बनेगा

इसकेअलावा गांवों के समीप वाच टावर भी बनाया जाएगा। कुरचुडीह, जेगोडकाई, बारूकांडे और मनिकाडीह में वॉच टावर बनेंगे। साथ ही हाथी प्रभावित गांवों के लिए दो-दो ड्रेगन लाइट भी दी जाएगी। फिलहाल कुरचूडीह जंगल में नौ की संख्या में हाथियों के मौजूद होने फसलों को क्षति पहुंचाने के मामले में वन विभाग त्वरित कार्रवाई करेगा। खरसावां के महतो और पश्चिम बंगाल के भोलानाथ के विशेष दल द्वारा हाथियों को खदेड़ने के लिए जल्द ही बुलाया जा रहा है।

दी जाएगी दो-दो ड्रेगन लाइट

तमाड़के बारूकांडे कुरचूडीह के समीप चारों ओर ड्रेन बनाया जाएगा, ताकि हाथी जंगल से निकल कर गांवों की ओर सकें। इसके अलावा वॉच टावर बनेंगे। हाथी प्रभावित गांवों के लिए दो-दो ड्रेगन लाइट भी दी जाएगी।

डीडीशर्मा, सहायकमुख्य वन संरक्षक

हाथी भोजन की तलाश में बस्तियों और खेतों की तरफ रुख करते हैं। उनके आने-जाने के प्राकृतिक रास्तों में खलल एवं अन्य प्रकार की दखलंदाजी से वे राह भटक कर गांवों और कस्बों में जाते हैं जिससे मानव के साथ उनका संघर्ष होता है। हाथियों को भगाने के लिए पटाखे फोड़ने और तेज आवाज वाले ढोल बजाने के तरीकों पर भी ऐतराज जताया। उन्होंने कहा कि तेज शोर से हाथियों का दल भ्रमित हो जाता है और ऐसे में आत्मरक्षा के लिए वे हमला कर देते हैं।

क्यों बढ़ रहे हैं हमले

पिछले साल जनवरी में एक जंगली हाथी राजधानी रांची के दीपाटोली स्थित सेना के कैंट इलाके में घुस आया था। सितंबर में हजारीबाग शहर में घुस आए 15 हाथियों ने काफी उत्पात मचाया था। विदित हो कि देश में हाथियों का एक प्रमुख प्राकृतिक रहवास एवं प्रजनन स्थल दलमा अभयारण्य झारखंड में स्थित है। इसके अलावा राज्य के अन्य वनों में भी हाथी रहत