24 में से 22 जिलों तक पहुंचा उग्रवाद
केंद्रीय बलों पर 2384 करोड़ खर्च के बाद भी प्रदेश अशांत
नक्सलपर नकेल कसने के प्रयास चाहे जितने भी हो रहे हों, सूबे की हकीकत यह है कि पिछले तेरह वर्षों में इसकी जड़ें और मजबूत ही हुई हैं। वर्ष 2001 तक जहां प्रदेश के 14 जिले नक्सल प्रभावित थे, अब यह संख्या बढ़ कर 22 हो गई है। पहले जहां प्रदेश में केवल एमसीसी और पीडब्ल्यू समेत कुछ छिटपुट उग्रवादी संगठन थे, वहीं अब संख्या में भी इजाफा हुआ।
इनकी संख्या अब डेढ़ दर्जन के करीब पहुंच चुकी है। इनमें दस संगठन अत्यधिक प्रभावी हैं। इससे साफ है कि नक्सल उन्मूलन अभियानों में केंद्र और राज्य सरकार के बीच समन्वय की कमी या फिर कागजों पर बनी बेहतरीन योजनाओं को जमीन पर उतारने में भारी गोलमाल हो जा रहा है।
यूनिफार्मसेवा का गठन या फिर पुलिस नियुक्ति में है पेंच : नक्सलउन्मूलन अभियान के लिए मैनपावर सबसे जरूरी तत्व है। पर राज्य सरकार प्रारंभ से ही पुलिस बल की कमी से जूझ रही है। केंद्रीय स्तर पर होने वाली हर बैठक में सरकार ने पुलिस और संसाधनों को रोना रोया। लेकिन अभी तक इसका कोई ठोस समाधान नहीं हो पाया है। स्थिति यह है कि राज्य में पुलिसबल की नियुक्ति हो या फिर नई यूनिफार्म सेवा का गठन, सभी अधर में लटके हुए हैं। सिपाही नियुक्ति का पेंच शैक्षणिक योग्यता को लेकर अटका हुआ है। राज्य सरकार जहां सातवीं पास को सिपाही बनाना चाह रही है, वहीं केंद्र सरकार इसके लिए दसवीं को न्यूनतम शैक्षणिक योग्यता करने का दबाव दे रही है। इसके कारण नियुक्ति अभी तक लटकी है।
{भाकपा माओवादी {टीपीसी {पीएलएफआई {जेपीसी {एसपीएस {एसजेएमएम
नक्सली संगठन
राजनाथ सिंह का प्रदेश भाजपा को समय भी अंतिम समय में 22 सितंबर को मिला। इसके बाद प्रदेश भाजपा कुछ रेस हुई और उनका एयरपोर्ट पर स्वागत और पार्टी मुख्यालय में अभिनंदन करने का फैसला किया गया। कार्यक्रम को सफल बनाने के लिए तैयारी शुरू हुई। इस बार राजनाथ सिंह की कोई आम बैठक या सभा तय नहीं हुई। सरकारी कार्यक्रमों में शामिल होने के बाद राजनाथ सिंह लगभग पांच बजे भाजपा मुख्यालय पहुंचेंगे। वहां उनका अभिनंदन किया जाएगा।
स्पेशल इंफ्रास्ट्रक्चर स्कीम के तहत पिछले पांच सालों में झारखंड पुलिस भवन निर्माण निगम लिमिटेड को 8395.15 लाख रुपए उपलब्ध कराए गए हैं। वर्ष 2008-09 में 2240 लाख, 2009-10 में 585 लाख, 2010-11 में 2008 लाख, 2011 12