बिना खेले ही खराब हो गए खेल के सामान
स्कूलों को मिली हैं लाखों रुपए की खेल सामग्री, जिन्हें छात्रों ने कभी देखा नहीं, फिर लाखों के बैट-बॉल देने की तैयारी
जिलेके कई हाई स्कूलों को शिक्षा विभाग ने लाखों रुपए की खेलकूद सामग्री दी। केंद्र सरकार की योजना के तहत इसकी खरीद की गई थी। लेकिन इनसे खेलना तो दूर, स्टूडेंट्स को इसको देखना तक नसीब हुआ। इसका नतीजा यह हुआ कि रखे-रखे ही खेल सामग्री खराब हो गई। कुछ सही-सलामत बची सामग्री को बक्से में बंद रखा जाता है। पर इसका पता स्कूल के छात्रों को भी नहीं है।
इधर, खबर है कि राष्ट्रीय माध्यमिक शिक्षा अभियान के तहत स्कूलों को लाखों रुपए के खेल सामान देने की फिर तैयारी की जा रही है। गत वर्ष शंकरी हाई स्कूल इटकी बेड़ो, रमेश सिंह मुंडा प्लस टू हाई स्कूल बेड़ो, जनता प्लस टू स्कूल खलारी, आजाद हाई स्कूल कर्बला चौक, एसएसवीवी हाई स्कूल डोरंडा को 20-20 हजार रुपए की खेल सामग्री दी गई थी। लेकिन इन स्कूलों में अधिकांश खेल के सामान खराब हो गए।
अधिकांश स्कूलों में शारीरिक शिक्षक नहीं
जिले के 90 फीसदी स्कूलों में शारीरिक शिक्षक ही नहीं हैं। ऐसे में खेलकूद की सामग्री का उपयोग सही ढंग से कैसे होगा। जबकि सभी स्कूलों में विभाग का निर्देश है कि खेलकूद हमेशा कराया जाए। इसके बाद भी नहीं किया जा रहा है। जबकि मॉनिटरिंग करना स्कूल का दायित्व है।
स्कूलों का होगा निरीक्षण
स्कूलोंको खेल के सामान दिए गए हैं। ये भी निर्देश है कि स्कूलों में खेल को बढ़ावा दिया जाए। केंद्र ने भी खेलकूद को प्रोत्साहन देने के लिए राशि उपलब्ध कराई है। स्कूलों में छात्रों को खेल सामग्री मिले और सही तरीके से रहे इसका निरीक्षण किया जाएगा। शिवचरण मरांडी, डीईओरांची।
खेल के कई सामान खेलने की वजह से खराब हो गए। छात्रों द्वारा सही ढंग से उपयोग नहीं किए जाने के कारण भी कई खेल सामग्री खराब हुई है। इसमें विद्यालय क्या कर सकता है। कुछ सामान बचे भी हैं, लेकिन खेल के मैदान नहीं हैं। इसलिए खेलकूद की सामग्री छात्रों को नहीं दी जा रही है।
विद्यालय के प्राचार्यों का तर्क
इन स्कूलों को मिल चुकी है खेल सामग्री
जनताहाई स्कूल खलारी, प्लस टू हाई स्कूल कांके, एमपीएम प्रोजेक्ट गर्ल्स हाई स्कूल रातू , किसान हाई स्कूल चान्हो, उत्क्रमित हाई स्कूल चान्हो, हाई स्कूल सोसई मांडर, राजकीयकृत हाई स्कूल लापुंग, राजकिशोर हाई स्कूल मक्का