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निर्धनता के कारण बाल मजदूरी दर में हो रही है वृिद्ध : उमेश सिंह
वर्तमानमें बाल मजदूरी विश्व की सबसे बड़ी समस्या है। इस समस्या की जड़ गरीबी है। गरीबी बढ़ने के साथ-साथ बाल मजदूरी की दर भी बढ़ी है। इससे निदान के लिए समाज के हर तबके को आगे आना होगा। ये बातें संयुक्त श्रमायुक्त उमेश प्रसाद सिंह ने कही। वे सोमवार को एचपीडीसी सभागार बहूबाजार में बाल मजदूरी विषय पर आयोजित राज्यस्तरीय कार्यशाला में बोल रहे थे। आयोजन मिजेरियोर जर्मनी के सौजन्य से जन सेवा परिषद और एनसीसीएल (नेशनल कोलिएशन अंगेस्ट चाइल्ड लेबर) हजारीबाग के तत्वावधान में किया गया था।
श्रमायुक्त ने कहा कि आजादी के लगभग 68 साल बाद हर क्षेत्र में विकास तो हुआ, लेकिन गरीबी खत्म नहीं हुई। हालांकि सरकार इसके निदान की दिशा में कार्यरत तो है, लेकिन परिणाम उम्मीद के अनुकूल नहीं है। उन्होंने यह भी स्वीकार किया कि इस दिशा में हमारा प्रयास पर्याप्त नहीं है। उन्होंने कहा कि बाल श्रम रोकने की दिशा में 250 कानून हैं, लेकिन उनमें से 20-25 ही क्रियान्वित हैं। उन्होंने सामाजिक संस्थाओं से बाल श्रम उन्मूलन संबंधी योजनाओं की जानकारी लोगों तक पहुंचाने की अपील की।
कार्यशाला में 18 जिले से एनजीओ के प्रतिनिधि, बाल श्रमिक उनके अभिभावक शामिल हुए। मौके पर लक्ष्मण कुमार गुप्ता, मीना देवी, राजेन कुमार, मोना हसन संजय केशरी, पूनम देवी मौजूद थे। संचालन जन सेवा परिषद के समन्वयक बी साहू ने किया।
सामाजिक कार्यकर्ता सच्चिदानंद ने कहा कि बाल मजदूरी की समस्या के उन्मूलन के लिए सरकार के साथ-साथ विभिन्न संगठनों की कथनी और करनी दोनों में एकरूपता जरूरी है। इसके लिए इच्छा शक्ति, कार्यक्षमता, दक्षता और पारदर्शित की आवश्यकता है।
पारदर्शिता जरूरी : सच्चिदानंद
लोक प्रेरणा के सतीश कर्ण ने कहा कि कानून और जानकारी के बावजूद बाल मजदूरी की समस्या है। ऐसे में सामूहिक प्रयास से चाइल्ड लेबर फ्री जोन बना सकें तो हम भाग्यशाली होंगे। उन्होंने पंचायत और अभिभावकों को भी आगे आने की जरूरत बताई।
सामूहिक प्रयास हो : कर्ण
एनसीसीएल के संयोजक रामलाल प्रसाद ने कहा कि देश के प्रत्येक पांच में से एक बच्चा बाल मजदूरी करता है। सरकार बाल मजदूरों का रेस्क्यू कर पुनर्वास का प्रयास तो करती है, लेकिन पर्याप्त साधन इच्छा शक्ति के अभाव में बाल मजदूरी नहीं रुक रही है।
साधन की है कमी : प्रसाद
बाल मजदूरी विषय पर एचपीडीसी में आयोजित राज्