करोड़ों का करंट
राजधानीसहित प्रदेशभर की जनता को सुचारू रूप से बिजली उपलब्ध कराने के नाम पर सरकार को 19 हजार करोड़ का करंट लग चुका है। यह करंट सरकार को दूसरे राज्यों से बिजली खरीदने की वजह से भुगतान के रूप में लगा है। आम लोगों को बिजली मुहैया कराने के नाम पर 19 हजार करोड़ के बिजली की खरीदारी राज्य गठन से लेकर अबतक सरकार कर चुकी है। इसके बाद भी बिजली को लेकर त्राहि-त्राहि मची है। सूबे का हर शहर बिजली की कटौती से त्रस्त है। गांव में तो बिजली का दर्शन ही दुश्वार है। लोड शेडिंग के नाम पर राजधानी के लोग भी हलकान हैं। घर, अस्पताल और कल-कारखाना बिजली की मार से सभी कराह रहे हैं।
उपभोक्ताबढ़े
राज्यमें बिजली की खपत पिछले चार सालों में दोगुनी हो गई है। चार साल के दौरान बिजली की खपत में 4910 मिलियन यूनिट की वृद्धि हुई है। वहीं दिसंबर 2013 तक बिजली उपभोक्ताओं की संख्या भी लगभग दुगुनी बढ़ी है।
दूसरे राज्यों से पीछे
अन्यराज्यों से हम पीछे है। गुजरात, आंध्रप्रदेश, केरल छत्तीसगढ जैसे राज्य भी है, जहां उपभोक्ताओं को क्वालिटी पावर दी जाती है। छत्तीसगढ में जीरो पावर कट की स्थिति है। वहीं गुजरात के गांव में भी 24 घंटे तक बिजली की आपूर्ति होती है। सिंचाई के लिए अलग से बिजली दी जाती है।
एक भी पावर प्लांट नहीं लगा
राज्यगठन से अबतक कोई पावर प्लांट नहीं लगाया जा सका है। यही नहीं, बिजली उत्पादन क्षमता बढ़ाने का भी कोई प्रयास नहीं किया गया है। राज्य में दिनों दिन बिजली की मांग बढ़ती ही जा रही है। राज्य सरकार ने बिजली उत्पादन के क्षेत्र में 24 कंपनियों के साथ एमओयू किया। इन कंपनियों द्वारा लगभग 40हजार मेगावाट बिजली उत्पादन का प्रस्ताव दिया गया है। लेकिन अबतक एक भी प्लांट नहीं लग पाया है। ऐसे में साफ है कि सरकार ने जवाबदेही से बचने खातिर एमओयू के बहाने का सहारा लिया है।
उपभोक्ताओं की संख्या
गिरिडीह 120963
धनबाद 166701
चास 142162
दुमका 211437
देवघर 228354
साहेबगंज 113445
सब-डिवी उपभोक्ता
रांची292017
गुमला 167549
जमशेदपुर 260345
चाईबासा 140253
हजारीबाग 23771
प्रदेशभर में एक नजर में बिजली की स्थिति
> राज्य गठन से लेकर अबतक नहीं लगा पावर प्लांट।
> राज्य में बिजली का उत्पादन 530 मेगावाट होता हैं।
> सेंट्रल सेक्टर से 400 मेगावाट बिजली ली जाती है।
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