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ब्लड बैंक में था खून, पर नहीं दिया, युवक की मौत
रिम्सब्लड बैंक की मनमानी अब मरीजों की जान पर बन आई है। रविवार तो हद ही हो गई। जब पॉजिटिव खून के लिए लोगों को ब्लड बैंक से वापस लौटना पड़ा। जबकि बैंक में खून उपलब्ध था। इस मामले का खुलासा तब हुआ, जब विवेक राय नामक युवक को पॉजिटिव खून की जरूरत पड़ी। राय गंभीर रूप से घायल था और उसका इलाज बूटी रोड स्थित मेडिका अस्पताल में चल रहा था। दुर्घटना के बाद अत्यधिक रक्त स्राव होने से उसकी हालत खराब थी। उसे पॉजिटिव खून की जरूरत थी। परिजन रिम्स पहुंचे तो एक यूनिट खून दिया गया, जबकि उसे तीन यूनिट खून की जरूरत थी। उसकी मौत हो गई।
परिजनों ने इसकी सूचना लाइफ सेवर्स के अतुल गेरा को दी। वे भी रिम्स ब्लड बैंक पहुंचे और मामले की जानकारी ली। गेरा के मुताबिक कर्मचारियों ने बताया कि बैंक में 60 यूनिट खून है, लेकिन जांच नहीं हुई है। इसलिए बिना जांच के किसी मरीज को खून नहीं दे सकते हैं। उन्होंने इस पूरे मामले को प्रशासन की लापरवाही बताया है। ब्लड बैंक का फोन डेड पड़ा है। पूरे मामले को निदेशक डॉ एसके चौधरी ने गंभीरता से लिया है और जांच कराने को कहा है।
रिम्स ब्लड बैंक में ग्रुप वाइज उपलब्ध ब्लड यूनिट की सूची, सूची में 60 यूनिट्स पॉजिटिव खून उपलब्ध होने की सूचना अंकित है।
विवेक राय के परिजनों ने राजधानी के बड़े प्रतिष्ठित अस्पताल प्रबंधन के खिलाफ गंभीर संगीन आरोप लगाए हैं। परिजनों का कहना है कि दुर्घटना के बाद गंभीर रूप से घायल विवेक को सेंटेविटा अस्पताल ले जाया गया, वहां कहा गया कि बेड खाली नहीं है। इसके बाद ऑर्किड अस्पताल ले गए। वहां भी वही जवाब मिला। जब दोस्तों ने कहा कि आईसीयू में भरती करें, ऑपरेशन की जरूरत है, तो इनकार कर दिया। इसके बाद रिम्स में दाखिल कराया गया। परिजनों ने कहा कि इन दो घंटे में विवेक का सही इलाज हो जाता, तो उसकी जान बचाई जा सकती थी।
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