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राइस मिलों को बकाए भुगतान का आदेश

7 वर्ष पहले
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खाद्यआपूर्ति सचिव ने राज्य के सभी जिला उपायुक्तों को पत्र लिख कर राइस मिलों से बकाया राशि की वसूली का आदेश दिया है। इसमें कहा गया है कि झारखंड उच्च न्यायालय के आदेशानुसार इन मिलों से तीन किस्तों में 31 दिसंबर तक हर हाल में वसूली सुनिश्चत करें। सचिव ने कहा है कि अगर निर्धारित अवधि तक राइस मिल से बकाए राशि जमा नहीं करते हैं, तो उनके विरुद्ध अवमानना वाद दायर करें। साथ ही अन्य प्रशासनिक कार्रवाई भी करें। सचिव ने 23 सितंबर को यह पत्र उपायुक्तों को लिखा है।

तीन किस्तों में भुगतान का आदेश

न्यायालयके आदेशानुसार विभाग ने डीसी को तीन किश्तों में राइस मिलों से वसूली का आदेश दिया है। उसमें 15 अक्टूबर तक 25 फीसदी राशि, 15 नवंबर तक फिर 25 फीसदी राशि शेष 50 फीसदी राशि की वसूली 31 दिसंबर 2014 तक करना है।

क्या है मामला

जिलोंमें 2012-13 के खरीफ मौसम में पैक्स और लैंप्स के माध्यम से किसानों से क्रय किए गए धान को चावल के रूप में परिवर्तित करने के लिए राइस मिलों को दिया गया। राइस मिलों ने प्राप्त धान के विरुद्ध कम मात्रा में चावल की आपूर्ति भारतीय खाद्य निगम को सुपुर्द नहीं किया। जिलों में राइस मिलों के यहां करोड़ों रुपए का चावल बकाया रह गया। इसके बाद राज्य सरकार ने धान के वास्तविक मूल्य 1298.05 रुपए की दर से राशि का दावा राइस मिलों पर कर दिया। राइस मील इसके विरुद्ध झारखंड हाईकोर्ट चला गया। हाईकोर्ट ने 13 सितंबर 2014 को दिए अपने आदेश में कहा कि राइस मिल सरकार को अविलंब बकाए की राशि 1250 रुपए प्रति क्विंटल की दर से भुगतान करे। शेष 48.05 रुपए प्रति क्विंटल के मामले में वह झारखंड राज्य न्यायिक सेवा प्राधिकरण में दो सप्ताह के भीतर वाद दायर करे।

खाद्य आपूर्ति सचिव ने जिलों के डीसी से कहा राइस मिलों से करें वसूली