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कलश स्थापन कल, विजयादशमी तीन को

7 वर्ष पहले
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शारदीयनवरात्र 25 सितंबर से शुरू हो रहा है। इस दिन माता के भक्त अपने घरों और पूजा पंडालों में कलश स्थापन करेंगे। इसकी तैयारी शुरू हो चुकी है। तीन अक्टूबर को विजयादशमी है। इस बार महाअष्टमी और महानवमी दो अक्टूबर को ही पड़ रही है। इसलिए नवरात्र की एक तिथि कम हो गई है।

पं कौशल किशोर मिश्र के अनुसार नवरात्र के पहले दिन हस्त नक्षत्र और ब्रह्मयोग पड़ रहा है। यह कलश स्थापना के लिए शुभ है। उन्होंने बताया कि बुधवार को दिन के 11 बजकर 6 मिनट से प्रतिपदा नक्षत्र शुरू होगा, जो गुरुवार को दोपहर 12.26 बजे तक रहेगा। इस नक्षत्र में भी कलश स्थापित करना भक्तों के लिए शुभ होगा। हालांकि, दिन में कभी भी कलश की स्थापना की जा सकती है। नवरात्र की पूर्णाहुति दो या फिर तीन अक्टूबर को भी की जा सकती है। क्योंकि दो अक्टूबर को सुबह 8.30 बजे से ही महानवमी शुरू होगी, जो तीन अक्टूबर को सुबह 6 बजकर 34 मिनट तक रहेगी। इसके बाद दशमी तिथि शुरू होगी। हालांकि, अधिकतर लोग तीन अक्टूबर को ही हवन करेंगे। क्योंकि इस दिन नवमी की उदयातिथि पड़ रही है। इधर, नवरात्र को लेकर बाजार में पूजा की खरीदारी जोर-शोर से चल रही है।

यह नवरात्र ज्यादा मंगलकारी

रांची।इस बार पहला नवरात्र करने वालों के लिए खास मंगलकारी है। यह कहना है पंडित रामदेव पांडेय का। उनका कहना है कि 2015 के आषाढ़ में मलमास खरमास रहेगा। इस कारण पहली बार नवरात्र, छठ, करवाचौथ, शिवरात्रि, चैत नवरात्र आदि व्रत शुरू करने वालों के इस बार का योग उत्तम है। इस बार नवरात्र जयद्योग में हो रहा है। साथ ही नवरात्र में दो दिन सर्वार्थसिद्धि योग भी है। कलश स्थापन के दिन कोई ग्रह अस्त भी नहीं है। इसलिए इस बार नवरात्र शुरू करना बहुत ही लाभदायक है। पंडित रामदेव के अनुसार अभी से जेठ तक नए व्रत शुरू कर सकते हैं। फिर 2015 के जून से मार्च 2016 तक नव शुरुआत बहुत फलदायी नहीं होगी। विवाह मुहूर्त भी अगले साल 16 जून तक ही हैं। इसके बाद नवंबर 2016 में विवाह मुहूर्त होंगे।

पंडित कौशल किशोर मिश्र ने कहा कि कोई भी गृहस्थ अपने घर में मां दुर्गा की अाराधना के लिए स्वयं कलश स्थापन कर सकता है। इसके लिए जो तैयारी है वह इस प्रकार है : स्नान-ध्यान करके घर के किसी हिस्से में पूजा की तैयारी करें। यहां पर मिट्टी, बालू मिलाकर जौ को छींट दें। फिर कलश में जल भरकर उसमें पंचर|, सिक्का, आम का पल