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कर्म से ही चरित्र का निर्माण : डॉ. पांडेय

7 वर्ष पहले
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किसीभी विद्यालय की सबसे बड़ी पूंजी चरित्र है। कर्म ही आपके चरित्र का निर्माण करता है। ये बातें आरयू के इतिहास विभाग के पूर्व विभागाध्यक्ष डॉ. एचएस पांडेय ने कहीं। वे मंगलवार को मोरहाबादी स्थित गंगा प्रसाद बुधिया सरस्वती विद्या मंदिर उवि में आयोजित सामाजिक सम्मिलन समारोह में बोल रहे थे। सम्मिलन का विषय विद्यालय के विकास में समाज की सहभागिता और विद्यालय से अपेक्षा था।

डॉ. पांडेय ने कहा कि शिक्षक समाज के अंधकार को दूर करने का प्रयास करें। विद्यार्थी भी समाज के उत्थान की दिशा में कार्य करें। डॉ. जीपी तुलस्यान ने कहा कि निजी विद्यालय भी अच्छी शिक्षा दे रहे हैं, लेकिन निजी विद्यालय के संचालकों ने शिक्षा का व्यवसायीकरण कर दिया है। इस अवसर पर ज्ञान प्रकाश बुधिया, डॉ. बालेश्वर नाथ पाठक, कविता वर्मा, अजय कुमार सिन्हा, बसंती वर्मा, चित्रांगदा वर्मा, वीरेंद्र पांडेय, आनंद प्रकाश मिश्र, मोनिका, बबीता, अंकिता शाहदेव, पार्वती मुंडा, अजय कुमार जैन, एसपी सिंह, केके देवघरिया और राजकुमार उपस्थित थे।

सरस्वती विद्या मंदिर में सामाजिक सम्मिलन समारोह का उद््घाटन करते अतिथि।

समाजशास्त्री डॉ. ध्रुव तनवानी ने राष्ट्र के विकास में हमारा योगदान विषय पर अपनी बातें रखीं। उन्होंने इंसान और जानवर में फर्क बताया। उन्होंने कहा कि जिसमें सामाजिक, संस्कार संस्कृति युक्त कार्य करने की क्षमता होती है, वह इंसान होता है। इनमें से तीनों हट जाए तो वह जानवर हो जाता है। सामाजिक सहमति तभी मिलेगी जब सोच सकारात्मक होगा। उन्होंने कहा कि सरस्वती विद्या मंदिर के विद्यालयों जैसा कोई अन्य विद्यालय नहीं है।

सकारात्मक सोच जरूरी : डॉ. तनवानी

वर्तमान शिक्षा पद्घति पर विद्या विकास समिति के डॉ. सुधांशु वर्मा ने कहा कि वर्तमान शिक्षा पद्घति में संस्कार विलुप्त हो रहा है। विद्यालयों में नैतिक और संस्कारयुक्त शिक्षा दिए जाने पर उन्होंने जोर दिया। उन्होंने कहा कि अंधकार से उजाले की ओर ले जाने वाली शिक्षा देने वाला ही असली गुरु है। तभी समाज और राष्ट्र का समेकित विकास होगा।

विलुप्त हो रहा है संस्कार : डॉ. वर्मा