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पूरे भाव से करें कार्य, प्रसन्न होंगी मां दुर्गा
पूरेभाव से किए गए कार्य से भगवान भी प्रसन्न होते हैं। इसके लिए किसी तरह की पूजा की जरूरत नहीं है। क्योंकि कर्म ही पूजा है। भाव सहित पूरी ईमानदारी से किया गया कार्य श्रेयस्कर होता है। यह कहना है पंडित देवकुमार भट्ट का। वे बताते हैं कि अध्यात्म कर्म में गहरा संबंध है।
पूजा-पाठ हो, जप-ध्यान हो, या फिर रोजी-रोजगार के लिए किया गया कार्य हो, श्रद्धा-भाव हर जगह जरूरी है। इसलिए जहां भी हैं, जिस कार्य में हैं, चाहे नौकरी-पेशा हैं, या व्यवसाय, पूरी ईमानदारी बरतें। और, इस नवरात्र पूरे भाव के साथ कार्य करने का संकल्प लें। मां दुर्गा प्रसन्न होंगी। इसके लिए कहीं कोई पूजा की जरूरत नहीं है।
ओरमांझी| नवजीवनविकास फाउंडेशन के सहयोग से शारदीय नवरात्र के अवसर पर भारत के 51 शक्तिपीठों के नाम संकल्पित कर मां वैष्णव देवी के साधक स्वामी रक्तांबर महाराज ने ओरमांझी के एसएस हाई स्कूल मैदान में दुर्गा सप्तशती कलश साधना शुरू की आचार्यों के द्वारा पूजा अर्चना की गई चार अक्टूबर तक स्वामी बिना अन्न जल ग्रहण नहीं करेंगे स्वामी के साधना को देखने के लिए गुरूवार की शाम काफी संख्या में भक्त पहुंचे क्षेत्र में इस तरह के आयोजन पहली बार हो रहा है जिससे लोगों में काफी उल्लास है मौके पर संरक्षक के रूप में प्रो आदित्य प्रसाद साहू , मानकी राजेन्द्र शाही, अमरनाथ चौधरी, शंभु तिवारी , रामवृक्ष महतो उपस्थित थे
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