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फूड टेस्टिंग लेबोरेटरी फिर बंद होने के कगार पर

7 वर्ष पहले
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राज्यलोक विश्लेषक ने 16 सितंबर को स्वास्थ्य मंत्री राजेंद्र सिंह से मुलाकात की। उन्हें पूरी स्थिति बताई। मंत्री ने उन्हें काम करते रहने को कहा है।

12 करोड़ रुपए से होना पड़ सकता है वंचित

12वींपंचवर्षीय योजना के तहत राज्य खाद्य जांच प्रयोगशाला को 12 करोड़ रुपए की स्वीकृति मिली है। इस पैसे से प्रयोगशाला का उन्नयन, आधुनिकीकरण, बेशकीमती उपकरणों की खरीद की जानी है। लोक विश्लेषक के अभाव में इस पैसे से वंचित होने पड़ सकता है। फूड लेबोरेटरी को ट्रेनिंग सेंटर फॉर इंडक्शन ट्रेनिंग ऑफ फूड सेफ्टी ऑफिसर के रूप में अधिसूचित किया जाना है।

बनने के बाद बंद हो गई थी लेबोरेटरी

लोकविश्लेषक नहीं होने के कारण भारत सरकार के सहयोग से बनी आधुनिक लेबोरेटरी वर्ष 2009 में बंद हो गई थी। कई बार विज्ञापन आमंत्रित किए जाने के बाद भी लोक विश्लेषक नहीं मिले। बाद में सितंबर 2012 में बिहार में कार्यरत लोक विश्लेषक जेके सिंह को यहां लाकर इसे चालू किया गया। डॉ. सिंह की अनुबंध अवधि अब समाप्त हो गई है।

जल्द होगा निर्णय

पूरीवस्तुस्थिति से सरकार को अवगत करा दिया गया है। फाइल सीएम के पास गई है जल्द ही निर्णय ले लिया जाएगा। लेबोरेटरी बंद नहीं होगी, इसका प्रयास किया जा रहा है। डॉ.प्रवीण चंद्रा, निदेशकप्रमुख (खाद्य)

डीबी स्टार >रांची

करोड़ोंरुपए की लागत से बनी राज्य की एक मात्र फूड टेस्टिंग लेबोरेटरी फिर से बंद होने के कगार पर है। प्रयोगशाला में कार्यरत एक मात्र राज्य लोक विश्लेषक का अनुबंध 12 सितंबर को समाप्त हो गया है। जबकि अभी तक नई नियुक्ति अथवा वर्तमान लोक विश्लेषक का अनुबंध बढ़ाने का निर्णय नहीं लिया जा सका है। जल्द ही त्योहारी सीजन शुरू होने वाला है। ऐसे में मिलावटी खाद्य पदार्थ बेचने वालों पर कारगर रोक लगाना संभव नहीं हो सकेगा।