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चुनाव परिणाम सांप्रदायिकता पर धर्मनिरपेक्षता की जीत

7 वर्ष पहले
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रांची | दसराज्यों में हुए उप चुनावों में भाजपा की करारी हार पर विपक्षी पार्टियों ने इसे सांप्रदायिकता पर धर्मनिरपेक्षता की जीत बताया है। इनका कहना है कि भाजपा ने जो अच्छे दिन के सपने दिखाए थे, उसकी पोल खुल चुकी है। एक सौ दिन में ही सच्चाई सामने गई कि झूठ ज्यादा दिन नहीं चल सकता। दूसरी ओर भाजपा का कहना है कि मोदी सरकार अच्छा काम कर रही है। कई महत्वपूर्ण निर्णय लिए गए हैं, लेकिन इसे धरातल पर उतरने में समय लगेगा। जनता की भावना होती है कि रिजल्ट तुरंत मिले। वैसे विस चुनाव स्थानीय मुद्दे पर लड़ें जाते हैं।

भाजपा के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष रघुवर दास ने कहा है कि यह सच है कि पार्टी चुनाव जीतने के लिए लड़ती है। पर उप चुनाव में अलग अलग राज्यों की अलग अलग परिस्थिति होती है। इसके परिणाम का देश और राज्य के हित को प्रभावित नहीं करता। इस चुनाव में क्षेत्र, उम्मीदवार का व्यक्तित्व हावी रहता है। झारखंड विधानसभा चुनाव में में इसका कहीं कोई प्रभाव नहीं पड़ेगा।

उप चुनाव के रिजल्ट पर प्रदेश भाजपा अध्यक्ष रवींद्र कुमार राय ने कहा है कि यह जनता की व्यग्रता का परिणाम है। लोकसभा चुनाव के बाद जनता शीघ्र रिजल्ट चाहती है। जनता में यही भावना दिखी है। कम समय में भाजपा उन्हें संतुष्ट नहीं कर सकी है। पर सच यह है कि बुनियादी परिवर्तन में समय लगता है और केंद्र की सरकार व्यवस्था में आमूलचूल परिवर्तन लाएगी। जनता का भरोसा मजबूत होगा।

पूर्व केंद्रीय मंत्री सुबोध कांत सहाय ने भाजपा के सांप्रदायिकता के प्रयोग पर धर्म निरपेक्षता का विजयी बताया है। कहा कि यह परिणाम देश के लिए अच्छे दिन और भाजपा के बुरे दिन का संकेत है। उन्होंने कहा कि देश के दस राज्यों में हुए उपचुनावों में भाजपा की करारी शिकस्त से साबित हो गई है कि देश की जनता भाजपा के झूठे चुनावी वायदों और प्रधानमंत्री के विकास के खोखले दिखावे को समझ चुकी है। यह चुनाव परिणाम इसलिए भी महत्वपूर्ण है कि भाजपा ने वोट के लिए समाज को बांटने के सारे प्रयास किए, पर मंसूबे सफल नहीं हुए।

उपचुनाव में भाजपा के लचर प्रदर्शन पर प्रतिक्रिया देते हुए झामुमो प्रमुख शिबू सोरेन ने कहा है कि काम नहीं करने का नतीजा भाजपा ने भुगता है। लुभावने नारे से भले ही कोई पार्टी सत्ता में जाए, पर वहां बने रहने के लिए काम करना पड़ता है। गुरुजी ने कहा कि पहले तो भाजपा की बिहार में हार