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राज्य के स्कूली बच्चों को अभी भी है अंडे का इंतजार
राज्यके स्कूलों में बच्चों को मध्याह्न भोजन के तहत हफ्ते में तीन अंडे या फल दिया जाना है। लेकिन अभी तक अंडे या फल नहीं दिए जा रहे हैं। सरकार की घोषणा के अनुसार, सितंबर के पहले सप्ताह से इस योजना को अमल में लाना था। यह निर्णय बच्चों को पौष्टिक आहार देने के उद्देश्य से लिया गया था। इसके लिए सरकार ने 25 अगस्त को 155 करोड़ रुपए की स्वीकृति भी प्रदान कर दी।
सप्ताहमें तीन दिन अंडे या फल देने थे
अंडाया फल देने के लिए चार रुपए की दर से हफ्ते में तीन अंडे दिए जाने थे। यानी हर हफ्ते एक बच्चे पर 12 रुपए खर्च किए जाने थे। कंडिका सात के अनुसार इन सामग्री का क्रय सरस्वती वाहिनी के माध्यम से स्थानीय स्तर पर किया जाना था। इसके लिए प्राधिकरण द्वारा सरस्वती वाहिनी के खाते में रुपए देने पर सहमति भी बनी थी। यह योजना पहली कक्षा से पांचवीं और छह से आठवीं के बच्चों के लिए बनी थी।
प्रक्रिया में संशोधन के लिए मंत्री ने लिखा था पत्र
मानव संसाधन विकास मंत्री गीताश्री उरांव ने अगस्त में राज्य के मुख्यमंत्री को बच्चों को अंडे उपलब्ध कराने की प्रक्रिया में संशोधन के लिए पत्र (पत्रांक : 975) लिखा। इसके माध्यम से कहा कि अंडा या फल उपलब्ध कराने के लिए राज्यस्तर पर सेंट्रलाइज्ड टेंडर जरूरी है। इसके लिए कंडिका सात में संशोधन की बात कही।
राज्य के 32 लाख 29 हजार 335 छात्रों के लिए हफ्ते में तीन-तीन अंडे या फल देने की योजना बनी थी। इसमें पहली कक्षा से पांचवीं तक के 23 लाख 35 हजार 658 और छह से आठवीं तक के आठ लाख 93 हजार 677 बच्चे शामिल हैं। इन बच्चों पर सप्ताह में तीन अंडा देने पर एक साल में एक अरब 55 करोड़ 80 हजार आठ सौ रुपए खर्च होने थे।
32 लाख से ऊपर बच्चे होते लाभान्वित