अबयह स्पष्ट हो गया
बढ़तेवाहनों की संख्या, गाड़ियों की तेज रफ्तार, खराब सड़कें, पार्किंग प्लेस का अभाव, ऑटों चालकों की मनमानी और शिथिल ट्रैफिक व्यवस्था ने आम जीवन को परेशानी में डाल दिया है। इन चुनौतियों का सामना करने के लिए ट्रैफिक व्यवस्था को चौकन्ना और दुरुस्त करने के साथ-साथ लोगों के बीच ट्रैफिक संबंधित नियमों पर सतत जागरूकता अभियान चलाने की जरूरत है। समय रहते हमें बचाव के ठोस उपाय निकालने होंगे।
अबयह स्पष्ट हो गया है कि हमारे राजनीतिज्ञ ही नक्सलवाद-आतंकवाद को बढ़ावा दे रहे हैं, राज्य के एक मंत्री की संलिप्तता भी सामने गई है। वोट की राजनीति तो नेताओं को करनी ही है, लेकिन भारत की जांच एजेंसियां स्वतंत्र नहीं हैं, इसलिए अपराध करने वाले, घोटाला करने वाले आदि अच्छी तरह जानते हैं कि कुछ होने वाला है नहीं, क्योंकि एक बार पैसा जाएगा, तो बिकने वालों को खरीद लेंगे! नक्सलियों के पीछे राजनीतिज्ञ हैं, फिर कैसे झारखंड में नक्सलवाद रुकेगा। अब तो अपराधी भी संसद पहुंच गए हैं, अब इनको कौन हाथ लगाएगा? इसलिए अपराध राजनीति एवं भ्रष्टाचार राजनीति एक हो गया है।
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प्रेम
पाठकों के पत्र
समय रहते चेतें और हादसों से बचें
राजनीति, अपराध एवं भ्रष्टाचार एक हो गया है!