राज्य में फर्जी आंदोलनकारी
अलगराज्य के आंदोलन में राज्य के कई युवा जेल गए। कइयों को जान गंवानी पड़ी। पर अब राज्य सरकार की ओर से दी जाने वाली पेंशन और लाभ लेने के लिए कई लोग फर्जी कागजातों के आधार पर आंदोलनकारी बन गए। आंदोलनकारियों की पहचान के लिए बनी झारखंड-वनांचल आंदोलनकारी चिह्नितिकरण आयोग के पास ऐसे कई आवेदन आए हैं, जिनमें फर्जी कागजातों का सहारा लिया गया है। आयोग इनके खिलाफ कड़ी कार्रवाई कर रहा है।
10 लोगों के खिलाफ जसीडीह थाने में केस दर्ज किया गया है। रांची समेत कई जिलों के दर्जनों लोग संदेह के घेरे में हैं। इनके खिलाफ जांच की जा रही है। पूरे राज्य से करीब 40 हजार आवेदन आयोग को प्राप्त हुए हैं। इस खुलासे के बाद आयोग आंदोलनकारियों की प्रॉविजनल सूची जारी नहीं कर रहा है। जिलों के एसपी से सभी कागजात के मिल जाने और इसके सत्यापन के बाद ही अंतिम सूची जारी की जा रही है।
पूरी जांच की जा रही है
फर्जीकागजातों के आधार पर खुद को आंदोलनकारी बताने वाले 10 लोगों के खिलाफ केस दर्ज कराया गया है। कई लोग अब भी संदेह के घेरे में हैं। आयोग पूरी जांच के बाद अपनी रिपोर्ट देगा। सभी जिलों के एसपी-डीसी को इस संबंध में पत्र भी भेजा गया है।
सेनि.जस्टिस विक्रमादित्य प्रसाद, अध्यक्षझारखंड वनांचल आंदोलनकारी चिह्नितिकरण आयोग
एसएसपी डीजीपी को लिखा गया पत्र
फर्जीआंदोलनकारियों के खिलाफ मुकदमा दर्ज कराने के लिए एसएसपी को पत्र लिखा गया है। आयोग का कार्यालय डोरंडा थाना क्षेत्र में होने के कारण यहां प्राथमिकी दर्ज कराने की बात हुई। बाद में उन संबंधित थाना क्षेत्रों में ही मुकदमा कराने का निर्णय लिया गया, जहां के वे निवासी हैं। मामले की जानकारी डीजीपी की भी दी गई है।
आयोग की ओर से चयनित आंदोलनकारियों के आश्रितों को तृतीय एवं चतुर्थ श्रेणी में नौकरी दिए जाने का प्रस्ताव है। इसके साथ ही आंदोलनकारियों को राज्य सरकार की नौकरियों में प्राथमिकता देने, जेल जाने वाले आंदोलनकारियों को या जेल में मृत आंदोलनकारियों के परिजनों को राज्य सरकार से आजीवन पेंशन भत्ता देने का भी प्रस्ताव है। छह माह से अधिक समय से जेल में रहने वाले आंदोलनकारियों को प्रतिमाह 5000 और छह महीने से कम अवधि तक जेल में रहने वाले आंदोलनकारियों को 3000 रुपया प्रतिमाह पेंशन देने का प्रस्ताव है। झारखंड आंदोलन के दौरान शहीद हुए लोगों के आश्रितों को निर्धा