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पवन अग्रवाल की हत्या से व्यवसायियों में रोष

7 वर्ष पहले
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व्यवसायीपवन अग्रवाल को गोली लगने के बाद उन्हें आनन-फानन में सेंटेविटा अस्पताल में ले लाया गया। पवन को गेट से इमरजेंसी तक पहुंचाने में अस्पताल के कर्मचारी आधा घंटा लगा दिए। परिजनों का आरोप है कि अगर समय पर उनका इलाज शुरू हो जाता, तो उनकी जान बच सकती थी। इलाज में देरी को लेकर व्यवसायी के परिजन परिचित अस्पताल के कर्मचारियों के साथ मारपीट करने पर उतारू हो गए। पुलिस ने बीच बचाव कर मामले को शांत कराया। इधर, घटना को लेकर शहर के व्यवसायी काफी गुस्से में हैं।

जल्दहोगी गिरफ्तारी : सिटीएसी अनूप बिरथरे ने बताया कि पता चला है कि दो अपराधियों ने घटना को अंजाम दिया है। सीने में दो गोलियां और हाथ में एक गोली मारी गई है।

बदहवास थे परिजन

व्यवसायीपवन अग्रवाल का पोस्टमार्टम शुक्रवार की सुबह रिम्स में होगा। पवन अग्रवाल की मौत के बाद उनके दोनों बेटे सुशील और दीपक और उनकी एक बेटी की स्थिति खराब हो गई। तीनों अस्पताल में मदद के लिए बदहवास कभी पुलिस के पास तो कभी डॉक्टर के पास भाग रहे थे। एक बेटा बार-बार कह रहे थे कि शहर में शरीफ लोगों का रहना मुश्किल हो गया है। लालपुर थानेदार से परिजन भिड़ गए और उन्हें खूब खरी खोटी सुनाई। पवन के घरवालों ने बताया कि पवन दुकान से कभी नकद लेकर घर नहीं आते थे।