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ग्रामीण कार्य की सड़कों को पथ निर्माण में लेने की आपाधापी
राज्यसरकार का पथ निर्माण विभाग मनमाने ढंग से काम का रहा है। ग्रामीण कार्य विभाग की सड़कों को पथ निर्माण विभाग में लेने की आपाधापी मची है। वैसी सड़कें जिन्हें ग्रामीण कार्य विभाग केंद्र सरकार की मदद से करीब 2000 करोड़ की लागत से बना चुका है, उनके चौड़ीकरण और मजबूतीकरण के नाम पर पथ निर्माण विभाग इतनी ही राशि पानी की तरह बहा रहा है। इस कार्य में विभाग के उच्च पदों पर बैठे अधिकारियों के साथ-साथ सरकार में शामिल बड़े नेताओं की भी सहभागिता बताई जाती है।
~80.5 करोड़ की हुई बढ़ोतरी
इस तरह से कुल चार योजनाओं की मूल तकनीकी स्वीकृति की राशि 119.5 करोड़ में 80.5 करोड़ रुपए की बढ़ोतरी की गई। इसी तरह से राज्यभर में चल रही योजनाओं की तकनीकी राशि को अवक्रमित कर उन योजनाओं में अरबों रुपए की राशि की बढ़ोतरी की जा रही है।
तुपुदाना बिरसा चौक पथ
तकनीकी स्वीकृति की राशि - 37 करोड़
अवक्रमितकर तकनीकी स्वीकृति की राशि - 57 करोड़
शाहपुर से गढ़वा पथ
तकनीकी स्वीकृति की राशि - 60 करोड़
अवक्रमितकर तकनीकी स्वीकृति की राशि - 90 करोड़
करमटोली चौक से पोटपोटो पथ भाया टैगोर हिल
तकनीकी स्वीकृति की राशि - 8.5 करोड़
अवक्रमितकर तकनीकी स्वीकृति की राशि - 29 करोड़
रांची-बरियातू पथ, आईआरक्यूपी (राइडिंगसरफेस की गुणवत्ता में सुधार कार्य)
तकनीकीस्वीकृति की राशि : 14 करोड़
अवक्रमितकर तकनीकी स्वीकृति की राशि : 24 करोड़
तकनीकी स्वीकृति के बाद भी बढ़ती है लागत
40 लाख की सड़कें दो करोड़ में
नियमों का हो रहा उल्लंघन
ग्रामीण सड़कों के निर्माण की लागत 40 से 50 लाख रुपए प्रति किलोमीटर आती है। जबकि उसी सड़क के चौड़ीकरण और मजबूतीकरण के नाम पर पथ निर्माण विभाग की लागत दो से सवा दो करोड़ हो जाती है। इसके पीछे कारण यह है कि पथ निर्माण विभाग ग्रामीण कार्य विभाग की पहले से बनी सड़क को उखाड़ कर उसका पुन: निर्माण करता है। इसमें 3.75 मीटर काली कृत पथ की चौड़ाई के बदले 5.5 मीटर तथा 7.5 मीटर पथ की चौड़ाई के बदले 9.0 मीटर करने के नाम पर पुन: डीपीआर तैयार की जाती है। इसके अलावा मिट्टी ढुलाई, पक्का पुल-पुलिया, नाली और गार्डवाल भी बनाया जाता है। यही वजह है कि योजना की राशि 40 लाख से बढ़कर दो करोड़ रुपए हो जाती है।
ग्रामीण कार्य की सड़कों को विधिवत रूप से पथ निर्माण विभाग में हस्तांतरित किए बिना इनकी न