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जीतेंगे, जीतने देंगे की रणनीति पर जुटा है जेपीए
कांग्रेसको सेक्युलर शक्तियों को एक मंच पर लाने की पहल करने तथा झाविमो से गठबंधन करने के प्रयास में जुटे झारखंड प्रोग्रेसिव एलायंस के अगुवा बंधु तिर्की भाव नहीं मिलने से नाराज बताए जा रहे हैं। बंधु इस प्रयास में जुटे हैं कि भाजपा को शिकस्त देने के लिए सभी सेक्युलर शक्तियों को एकजुट होना चाहिए और इसका नेतृत्व कांग्रेस को करना चाहिए। मगर कांग्रेस द्वारा कोई स्पष्ट जवाब नहीं मिलने से अब छोटे दलों निर्दलीयों को एक मंच पर लाकर चुनाव लड़ने का मन बना रहे हैं। अब जेपीए इस रणनीति पर काम कर रहा है कि अगर कोई मजबूत गठबंधन नहीं बनता है तो वे लोग 30 से 40 सीट पर अपना प्रत्याशी खड़ा करेंगे। इसकी रणनीति होगी जीतेंगे और जीतने देंगे। पिछले दिनों धनबाद में हुई टीएमसी की बैठक में बंधु ने स्पष्ट कर दिया है कि कांग्रेस का रुख अगर यही रहा तो वे लोग भी कमजोर नहीं हैं। अकेले चुनाव मैदान में उतरेंगे जिससे कई सीटों पर यूपीए का खेल बिगड़ा जाएगा।
जेपीए झारखंड के आठ से दस सीट पर प्रभाव डाल सकता है। इसमें मांडर, बिशुनपुर, कोलेबिरा, सिमडेगा, जगन्नाथपुर, लोहरदगा, गुमला, सिसई, चाईबासा, खिजरी, तोरपा, खूंटी आदि शामिल हैं। अगर हरिनारायण राय, विदेश सिंह और भानु इसमें जाते हैं तो इनकी सीट पर ये लोग प्रभाव डाल सकते हैं।
आठ सीटों पर डाल सकते हैं प्रभाव