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तनाव जच्चा-बच्चा के लिए खतरा : डॉ. चटर्जी

7 वर्ष पहले
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प्रेगनेंसी के दौरान तनाव जच्चा-बच्चा के लिए खतरे की घंटी है। इससे बचने के लिए प्रेगनेंट महिला को तनाव से दूर रहना होगा। तनाव बढ़ने से ब्लड प्रेशर हाई होगा, जिससे शरीर के मेजर पार्ट्स ब्रेन, हार्ट, लीवर, किडनी पर असर पड़ सकता है। ये बातें कोलकाता के डॉ. अलोकेदू चटर्जी ने कही। वे तीन दिवसीय अाईसोपर्व 14 मिड टर्म सीएमई के सेमिनार में बोल रहे थे। कहा कि ज्यादातर जच्चा-बच्चा की मौत पोस्टपार्टम हेब्रेज (पीपीएच) के कारण होती है। डॉ. चटर्जी ने कहा कि प्रेगनेंसी से पहले और बच्चे के जन्म तक कम से कम चार बार एंटी नेटल चेकअप कराना चाहिए। मौके पर डॉ. उषा रानी, डॉ. प्रीति बाला सहाय, डॉ. शोभा चक्रवर्ती, डॉ. सुमन सिन्हा, डॉ. अाभा सिन्हा के अलावा देश के विभिन्न राज्यों से 200 डॉक्टर सेमिनार में हिस्सा लेने आए हैं।

डॉ. चटर्जी ने कहा कि रेगुलर एएनसी जांच कराना चाहिए। बच्चा होने तक अस्पताल में रेगुलर जांच, ब्लड एग्जामिनेशन कराए और डॉक्टर की सलाह लेने के बाद ही एनिमिक प्रेगनेंट महिला आयरन फॉलिक एसिड दवा का उपयोग करें।

सेमिनार में बताया गया कि कई बार यूटरस रैप्चर्ड होने के कारण डिलिवरी के दौरान ज्यादा ब्लीडिंग होती है, जिससे जच्चा और बच्चा की मौत होने का खतरा रहता है। डॉ. चटर्जी ने कहा कि एबोर्शन कराने के दौरान मेडिकल उपकरण से कभी-कभी यूटरस में होल हो जाता है, जो कि तभी पता चलता है जब दूसरी बार महिला प्रेगनेंट होती है। वैसे यूटरस रैप्चर्ड होने के कई और कारण भी हंै।

कैसे बचा जाए

ज्यादा ब्लीडिंग होने से होती है मौत