निर्माण धीमा, खर्च तेज
उन्नीसबड़ी सिंचाई योजनाओं में चार हजार करोड़ से अधिक खर्च करने के बावजूद जल संसाधन विभाग सिंचाई के लिए एक बूंद भी खेतों में पानी उपलध नहीं करा सका है। इस हाल में भी विभाग को योजनाओं की लागत बढ़ाने से गुरेज नहीं। हर हाल में योजना बजट बढ़वाने के तरीके खोजने में जुटे हैं। कुछ प्रोजेक्ट तो 35-40 साल से चल रहे हैं, लेकिन आधा काम भी मुश्किल से हुआ है।
स्थिति की भयावहता आप इसी से समझ सकते हैं कि किसानों की जमीन वर्षों पहले ले ली गई, लेकिन वे अब भी पानी को तरस रहे हैं।
कर्जमें डूबे किसान
योजनाओंके लिए 43 हजार किसानों ने अपनी जमीन दी। सिंचाई की उम्मीद में। अब लगातार सूखा है और किसान कर्ज के चुंगल में फंसे हैं। कोई नहीं बता रहा पानी कब मिलेगा।
अफसरोंने ठेकेदारों पर नहीं बनाया दबाव
जलसंसाधन विभाग को निर्माण समय से पूरा करने के लिए ठेकेदारों पर दबाव बढ़ाना चाहिए कि उसकी लागत। पिछड़ती योजनाओं में पानी की तरह पैसा बहाया जा रहा है। बिहार के समय शुरू होने वाली सभी योजनाओं का काम धीमी गति से चल रहा है। मगर खर्च में सरकार पीछे नहीं है। राज्य गठन के बाद से इन योजनाओं पर 2400 करोड़ से अधिक की राशि खर्च की जा चुकी है।
सिंचाई होती : 3.87 लाख हेक्टेयर में
कई योजनाएं होंगी पूरी
परियाेजनाओंकी लगातार मोनिटरिंग के लिए सेल का गठन किया गया है। बाधाओं को दूर कर सिंचाई परियोजनाओं के अधूरे कार्यों को जल्द से जल्द पूरा करने का निर्देश दिया गया है। जल्द कई योजनाएं पूरी हो जाएंगी।
अन्नपूर्णादेवी, मंत्रीजलसंसाधन
1977 में शुरू हुई 128.99 करोड़ की सुवर्णरेखा परियोजना पर अब तक 2040 करोड़ का खर्च हो चुका है। योजना की माेनिटरिंग करने वाले जल संसाधन विभाग के 37 कार्यपालक अभियंता भी रिटायर हो गए। इस योजना के तहत बनने वाली चांडिल बाई नहर, गालूडीह बाई नहर और खरकई बराज में अभी तक कोई कार्य नहीं हुआ है। दूसरी योजनाओं की प्रगति भी कुछ इसी तरह की है। कुल 19 सिंचाई परियोजनाओं की माेनिटरिंग करने वाले 145 कार्यपालक अभियंता अभी तक रिटायर हो गए हैं। जब तक योजनाएं पूरी होंगी तब तक रिटायर होने वाले इंजीनियरों की संख्या ढाई सौ हो जाएगी।
रिटायर हो गए 37 कार्यपालक अभियंता
1.54 लाख हेक्टेयर बढ़ी सिंचाई सुविधा
राज्यके कुल क्षेत्रफल 79.72 लाख हेक्टेयर में से 29.74 लाख हेक्टेयर भूमि खेती योग्