एनआरईपी-2 के ईई से मांगी गई रिपोर्ट
डीबी स्टार >रांचीस्टेटऑफ आर्ट रिम्स ऑडिटोरियम के निर्माण में बरती गई अनियमितता मामले में एनआरईपी-2 के कार्यपालक अभियंता (ईई) से प्रतिवेदन मांगा गाया है। रिम्स निदेशक डॉ. एसके चौधरी की ओर से कार्यपालक अभियंता से पूछा गया है कि वे इसपर स्पष्ट प्रतिवेदन दें कि हैंडओवर के एक साल बाद ही ऑडिटोरियम में दरार कैसे गई। क्यों नहीं उनके खिलाफ कार्रवाई के लिए सरकार को लिखा जाए। रिम्स ऑडिटोरियम का निर्माण 9,15,82,100 रुपए में किया गया था। ऑडिटोरियम का निर्माण 25 नवंबर 2008 में शुरू हुआ, जबकि भवन को 30 अप्रैल 2014 को हैंडओवर लिया गया। डीबी स्टार ने 22 जुलाई को रिम्स ऑडिटोरियम के घटिया निर्माण (हेडिंग- घोटाले का ऑडिटोरियम) प्रकाशित किया था। खबर छपने के बाद स्वास्थ्य मंत्री राजेंद्र सिंह ने इसे गंभीरता से लिया और मामले की जांच के आदेश दिए।
1000लोगों के है बैठने की व्यवस्था
ऑडिटोरियममें 1000 लोगों के बैठने की क्षमता है। करीब 9.60 करोड़ में बने इस ऑडिटोरियम को बनाने में दो साल लगे। ऑडिटोरियम डबल स्टोरी सेंट्रली एसी है। इसमें पावर प्वाइंट प्रेजेंटेशन के साथ यामाहा का साउंड सिस्टम और प्रोजेक्टर लगा है।
ऑडिटोरियम हैंडओवर लेने से पहले रिम्स प्रबंधन के अधिकारियों ने चेक नहीं किया। नियमतः बिल्डिंग के हैंडओवर लेने से पहले तकनीकी समिति से जांच कराई जाती है ताकि यह देखा जा सके कि बिल्डिंग का निर्माण डीपीआर (डिटेल प्रोजेक्ट रिपोर्ट) के तहत हुआ है कि नहीं।
एक साल भी नहीं बीता है कि भवन में कई जगह दरारें पड़ गईं हैं। स्टेज जगह-जगह टूटे हुए हैं। घटिया निर्माण और एसी का ठीक नहीं करना अनियमितता का घोतक है। रिम्स शासी परिषद की ओर से ऑडिटोरियम निर्माण की जांच के लिए एक कमेटी का भी गठन किया गया है। इसमें भवन निर्माण विभाग के कार्यपालक अभियंता, बिजली विभाग के कार्यपालक अभियंता और आर्किटेक्ट चड्ढा एंड कंपनी को रखा गया है। कमेटी की जांच रिपोर्ट आने के बाद संबंधित इंजीनियरों और ठेकेदारों के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।
बिना चेक किए लिया गया हैंडओवर
एक वर्ष में पड़ गईं दरारें
> पूछागया, सालभर में ही कैसे पड़ने लगी दरार
>क्योंनहीं कार्रवाई के लिए सरकार को की जाए अनुशंसा
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