प्रेस-पुलिस के नाम पर जमाते हैं रौब
राजधानीमें फर्जी लोग प्रेस और पुलिस का नाम लेकर कई अवैध कारोबार कर रहे हैं। थानों में जाकर अपना रौब दिखाते हैं और मनमाने ढंग से काम करा लेते हैं। प्रशासनिक कार्यालयों में भी रौब दिखाने में वो नहीं चुकते। विशेष कर राजधानी के ग्रामीण इलाकों के सभी थानों में फर्जी तरीके से प्रेस और पुलिसवाला बनकर अपने अवैध कामों को वैध करा रहे हैं। राजधानी में जमीन के व्यवसाय से जुड़े लोग धड़ल्ले से इन दो शब्दों का दुरुपयोग कर रहे हैं। हाल के दिनों में थानों में कई ऐसे मामले आए हैं जिसमें जांच के बाद पता चला कि जो थाना में बैठकर प्रेस और पुलिस का रौब जमा रहे थे, वो अपराधी थे।
सुखदेवनगर पुलिस ने कुख्यात अपराधी गौतम सिंह को मेन रोड से गिरफ्तार किया था। पुलिस ने उसके पास से जो बाइक बरामद की थी उस पर पुलिस का नंबर प्लेट लगा था। पूछताछ के क्रम में गौतम ने पुलिस को बताया था कि रास्ते में पुलिस उसे पकड़ती थी तो खुद को पुलिसवाला बता कर बच निकलता था। गौतम की बाइक अभी भी थाना में जब्त है।
बरियातू पुलिस ने महिला से चेन लूटने के आरोप में युवक अभिषेक को पकड़ा था। अभिषेक ने थानेदार फगुनी पासवान से कहा था कि वह प्रेस में काम करता है। जब जांच की गई तो पता चला कि वह प्रेस में नहीं है। पुलिस ने छिनतई के आरोप में गिरफ्तार कर उसे जेल भेज दिया था।
सुखदेवनगर थाना क्षेत्र में रहने वाले मदन लाल शर्मा की मौत नौ दिसबंर 2012 में हुई थी। कुछ युवकों नेे उनके घर में घुसकर मारपीट की थी। इलाज के दौरान उनकी मौत हो गई थी। इसमें अरुण वर्मा, संजय वर्मा, राजेश कुमार, सोनू कुमार, दीपक वर्मा समेत कई लोगों पर नामजद प्राथमिकी दर्ज हुई थी। नामजद आरोपियों ने थाना में पहुंच कर पहले ही मामला दर्ज करा दिया। इस दौरान सारे आरोपियों ने प्रेस का नाम लेकर थाना में रौब भी दिखाया।
केस थ्री
केस वन
केस टू
वाहन पर मोटे अक्षरों में प्रेस लिखकर पुलिस पर रौब गांठने को किसी भी सूरत में सही नहीं ठहराया जा सकता है। पत्रकारिता एक मिशन है और इससे जुड़े साथियों को सामाजिक जीवन में भी शुचिता का आदर्श प्रस्तुत करना चाहिए। समाज में पत्रकारिता की प्रतिष्ठा धूमिल होने से बचाने की जिम्मेवारी भी हम पत्रकारों की ही है। दैनिक भास्कर के कर्मियों ने संकल्प लिया कि वे अपने वाहन से प्रेस स्टीकर आज ही हटा देंगे, ताकि इसकी आड़ में फर्जी लोग प्रशासन को