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गीत गाकर बहनों ने दी सामा को िवदाई

7 वर्ष पहले
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झारखंडमैथिली मंच के तत्वावधान में गुरुवार को भाई-बहन के स्नेह का मैथिल लोक पर्व सामा चकेवा का समापन महोत्सव आयोजित किया गया। कार्यक्रम विद्यापति दालान में हुआ। शुरुआत विद्यापति द्वारा रचित गीत जय-जय भैरवी असुर भयाउनी से हुई। मौके पर उपस्थित सभी ने एक साथ गीत गाया। अतिथि के रूप में मैथिल विदुषी नर्मदा भारद्वाज, मंच के अध्यक्ष काशीनाथ झा, सचिव कृष्ण कुमार झा उपस्थित हुए। नर्मदा भारद्वाज ने कहा कि लोक पर्व सांस्कृतिक चेतना लिए होते हैं। इसका आयोजन धूमधाम से करना चाहिए। मैथिल पुत्रियों ने इस अवसर पर सामा चकेवा के गीत गाए। नीलिमा ठाकुर पूनम मिश्रा ने गीत पेश किए।

अपने-अपने घरों से लोग चंगेरा में सामा-चकेवा, सत भइया, चुगला, वृंदावन, बाटो बहिनी आदि लेकर आए। सुंदर चंगेरा को प्रथम, द्वितीय और तृतीय पुरस्कार दिए गए। कार्यक्रम के अंत में समादान गाकर चंगेरा की सामग्री भसान स्थल पर विसर्जित की गई। कार्यक्रम का संचालन सीमा झा धन्यवाद ज्ञापन प्रेमचंद झा ने किया। आयोजन में ब्रज किशोर झा, जयंत झा, सर्वजीत चौधरी, संजय मिश्रा, सतीश झा, अमरनाथ झा, भारतेंदु झा, अरुण झा आदि का सहयोग रहा।

{विद्यापति गीत के साथ कई सांस्कृतिक कार्यक्रम आयोजित

सांस्कृतिक कार्यक्रम का आनंद उठाते लोग।

मंच पर सजाए गए चंगेरों में रखे गए सामा चकेवा।