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बोगार्ट की परिकल्पना है टीएचएमसी : डॉ. अलेक्स

7 वर्ष पहले
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एक्सआईएसएस-टीएमसीएच(ट्राइबल हैंडिक्राफ्ट मार्केटिंग सेल) फादर एमवीडी बोगार्ट की दूरगामी सोच का मूर्त रूप है। फादर बोगार्ट गांव की पारंपरिक कलाकृति को विशेष पहचान दिलाने के इच्छुक थे। उनकी सोच थी कि ग्रामीण कला को ही रोजगार का साधन क्यों नहीं बनाया जाए। इसी सोच के तहत उन्होंने ग्रामीण हस्तनिर्मित उत्पादों को बाजार में उतारा।

उक्त बातें बतौर मुख्य अतिथि एक्सआईएसएस के निदेशक फादर डॉ. अलेक्स एक्का ने कहीं। वे बीते दिन डॉ. कामिल बुल्के पथ में एक्सआईएसएस-टीएचएमसी के नए प्रतिष्ठान के उद्घाटन मौके पर बोल रहे थे। उद्घाटन समारोह में डॉ. सजीत लकड़ा, प्रो. केके भगत, प्रो. एचके सिंह, प्रो. अमर तिग्गा, प्रो. र|ेश चतुर्वेदी, प्रो. राजश्री, डॉ. अनुज प्रसाद, प्रो. मधुमिता, प्रो. अनिरुद्ध प्रसाद, डॉ. संत कुमार , प्रो. अराना कौशर, डॉ. अमरदीप सिंह, सुजीत केरकेट्‌टा, डॉ. संजीव बजाज, रागिनी, हरप्रीत सिंह और प्रो. भास्कर भवानी समेत भारी संख्या में लोग मौजूद थे।

एक्सआईएसएस-टीएमसीएच गुमला के अराउज संगठन द्वारा निर्मित कई उत्पाद यहां उपलब्ध हैं। आदिवासी डेवलपमेंट नेटवर्क (एडीएन) के मंच की पहल पर यहां ट्राइबल आर्ट एंड क्राफ्ट संबंधी सामग्री उपलब्ध हैं। इनमें सिल्क साड़ी, बीरू शॉल, पेंटिंग में कोहबर, सोहराई, जादू पटिया, टोटका भित्तिचित्र, हस्तनिर्मित डेकोरेटिव फूल आदि शामिल हैं।

ये उत्पाद उपलब्ध

डॉ. एक्का ने कहा कि 1985 में फादर बोगार्ट ने एक्सआईएसएस-टीएचएमसी की शुरुआत की थी। इसके प्रथम सेक्रेटरी प्रो. एके सिन्हा थे। उस समय बांस से निर्मित सामग्री, सूत और जूट से बने फोल्डर, मैट्रेस, बैग और साड़ियाें का निर्माण होता था। एक्सआईएसएस के डिप्टी डायरेक्टर फादर डॉ. रंजीत पी टोप्पो ने बताया कि गांव की पारंपरिक कलाकृति को विशिष्ट पहचान दिलाना एक्सआईएसएस का उद्देश्य है।

1985 में हुई शुरुआत

उद््घाटन समारोह में मौजूद डॉ. अलेक्स एक्का, डॉ. रंजीत पी टोप्पो अन्य।