- Hindi News
- समय की मांग है खुद को बदलें शिक्षक : सुब्रह्मण्यम
समय की मांग है खुद को बदलें शिक्षक : सुब्रह्मण्यम
साइंस की तरक्की के साथ सूचना और तकनीक के इस युग में शिक्षा के क्षेत्र में भी व्यापक परिवर्तन हुए हैं। खासकर बच्चों की रुचि और तकनीकी ज्ञान में भी विकास हुआ है। इसलिए आज के युग में जरूरी हो गया है कि शिक्षक बच्चों के साथ सीखें। छात्रों के ज्ञान स्तर और रुचि को जानें और अपनी शिक्षण शैली में बदलाव लाएं।
शिक्षक यथासंभव बच्चों से सीखने में कोई गुरेज करें। यह बातें सीबीएसई के फॉरमर डायरेक्टर शिक्षाविद जी बाला सुब्रह्मण्यम पियरसन प्रालि के सहयोग से संत जेवियर्स स्कूल में शनिवार को आयोजित कार्यशाला में कही। इसमें राजधानी के 12 आईसीएसई स्कूल से 100 लोग (प्रिंसिपल्स और स्टाफ) शामिल हुए। सुब्रह्मण्यम ने कहा कि वर्तमान युग में बच्चों को शिक्षित करने से पूर्व शिक्षण प्रणाली को सुनिश्चित करें। इसमें बच्चों की क्रिएटिविटी को ध्यान में रखें। उन्होंने क्रिएटिविटी इन क्लास रूम कीे थीम पर शिक्षकों को बच्चों की प्रतिभा को जानने और निखारने पर जोर दिया। कार्यशाला में संत थॉमस स्कूल, संत जेवियर्स स्कूल, लोरेटो, सेक्रेड हार्ट स्कूल, संत चालर्स स्कूल, संत फ्रांसिस स्कूल हरमू, संत अंथोनी स्कूल, डॉन बॉस्को स्कूल, डब्ल्यू जॉन स्कूल, लीवंस एकेडमी लोहरदगा, बिशप हार्ट मैन स्कूल के प्रिंसिपल्स और स्टाफ शामिल थे।
इससे पूर्व संत जेवियर्स स्कूल के प्रिंसिपल फादर अजीत कुमार खेस ने रिसोर्स पर्सन जी बालासुब्रमण्यम का स्वागत कर उनका विस्तृत परिचय दिया। रूचि उपाध्याय के धन्यवाद ज्ञापन के साथ कार्यशाला का समापन हुआ।
संत जेवियर्स स्कूल में टीचर्स वर्कशॉप में बोलते जी. बाला सुब्रह्मण्यम।