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राजधानीमें वाहनों के प्राइवेट रजिस्ट्रेशन कराकर उनका कॉमर्शियल इस्तेमाल किया जा रहा है। सैकड़ों वाहन मालिक ट्रेवल एजेंसियों ने कमाई का नया धंधा खोज निकाला है। वे टैक्स से बचने के लिए कॉमर्शियल की बजाय प्राइवेट रजिस्ट्रेशन बनवा रहे हैं। परिवहन विभाग के नियमों को ताक पर रख कर ये मोटी कमाई कर रहे हैं। जबकि, इससे सरकार को सालाना करोड़ों रुपए के राजस्व की हानि हो रही है।
सीटके अनुसार टैक्स
एमवीआईएक्ट के तहत नए वाहनों का निबंधन उसके मूल्य का चार से नौ फीसदी तक है। यह वाहनों के मॉडल, सीट और कंपनी पर निर्भर है। वहीं, व्यवसायिक वाहनों को प्रत्येक तिमाही आठ सौ रुपए से 1000 रुपए टैक्स देना पड़ता है। यह राशि जब तक वाहन चालू स्थिति में रहेगा, देना होगा है। निजी वाहनों के निबंधन में चार से नौ फीसदी टैक्स एक मुश्त 15 वर्षों के लिए भुगतान करना होता है।
पुलिस नहीं करती जांच
मोटरव्हीकल एक्ट (एमवीआई एक्ट ) के सेक्शन 200 के तहत ट्रैफिक पुलिस भी वाहनों के प्राइवेट कमर्शियल रजिस्ट्रेशन की जांच कर सकती है, लेकिन चार पहिया वाहनों की जांच नहीं की जाती।
गैरकानूनी है इस्तेमाल
प्राइवेटरजिस्ट्रेशन पर सवारी ढोना या गाड़ी को किराए पर देना एमवीआई एक्ट के तहत गैरकानूनी है। ऐसे वाहनों को पकड़े जाने पर जुर्माना देना पड़ता है। ऐसे लोगों को पांच हजार रुपए तक जुर्माना का प्रावधान है। डीटीओ के अनुसार कॉमर्शियल उपयोग में लाए जा रहे प्राइवेट वाहनों को पकड़ने पर उनके रजिस्ट्रेशन के समय से पकड़े जाने तक की तिथि का कॉमर्शियल टैक्स बतौर फाइन चुकाना पड़ सकता है।
राजेश कुमार, डीटीओ,रांची
कार्रवाई शुरू हो गई
सीधी बात
प्राइवेट वाहन कमर्शियल यूज कर रहे हैं कार्रवाई क्यों नहीं हो रही।
वाहनोंका कमर्शियल यूज करने वालों के खिलाफ कार्रवाई शुरू हो गई है। सीसीएल से लिस्ट मंगाई गई थी, उनमें आठ वाहन प्राइवेट मिले हैं। सभी को नोटिस भेजा गया। दो दिन में अगर टैक्स जमा नहीं करते हैं, सख्त कार्रवाई होगी।
शहरमें कई स्थानों पर अवैध रूप से ऐसे वाहन किराया में दिए जा रहे हैं।
शहरके सभी ट्रैवल एजेंसियों, होटलों और दूसरे जगह से किराया में वाहन देने वाले स्थलों की जांच की जाएगी। किसी भी हाल में टैक्स चोरी करने वालों को नहीं बख्शा जाएगा।
कमर्शियल वाहनों को प्रत्येक साल फिटनेस और प्रदू