निगरानी पर भारी आरोपी अफसर
भ्रष्टाचारके मामले में घिरे राज्य के कई अफसर निगरानी जांच को धता बता रहे हैं। निगरानी ब्यूरो की ओर से कई नोटिसों के बाद भी वे उपस्थित नहीं हो रहे और ही पूछताछ का जवाब दे रहे हैं। निगरानी की ओर से मांगी जाने वाली अभियोजन स्वीकृति का मामला भी लटकाया जा रहा है। ऐसे मामलों में अब निगरानी ने कड़ा रुख अख्तियार करते हुए विभागीय सचिवों को पत्र लिखा है। इसमें कहा गया है कि जांच के लिए उपस्थित नहीं होनेवाले अधिकारियों-कर्मचारियों को सरकार से स्तर से आदेश दिया जाए। अगर वे फिर भी जांच के लिए उपस्थित नहीं होते हैं, तो उन्हें निलंबित किया जाए।
परिवारकी संपत्ति नहीं बता रहे आरोपी
निगरानीब्यूरो की ओर से 09 जुलाई और 01 अगस्त 2014 को आरोपी ड्रग इंस्पेक्टर सुमंत कुमार तिवारी को पत्र लिखकर उनके विरुद्ध लगाए गए आरोपों के संबंंध में अपना पक्ष रखने को कहा गया था। साथ ही अपने परिवार की सूची देते हुए संपत्ति का विवरण उपलब्ध कराने को कहा गया था। परंतु बार-बार पत्राचार किए जाने के बाद भी तिवारी निगरानी ब्यूरो में उपस्थित नहीं हुए। साथ ही उन्होंने अपने परिवार की सूची तथा उनकी संपत्ति के बारे में भी सूचना नहीं दी है। निगरानी की ओर से कहा गया है कि सुमंत कुमार तिवारी जांच में सहयोग नहीं कर रहे हैं।
मैंने जवाब भेज दिया है
निगरानीका पत्र मिलने के बाद मैंने जवाब भेज दिया है। फिर से क्यों पत्र भेजा जा रहा है, यह समझ से परे हैं। मेरे खिलाफ जांच में सहयोग नहीं करने का आरोप भी गलत है।
सुमंतकुमार तिवारी, उपनिदेशक औषधि
नहीं मिली आरोपी डीआई पर अभियोजन स्वीकृति
निगरानीने घूस लेने के आरोपी रांची के फूड इंस्पेक्टर संजय कुमार के खिलाफ अभियोजन की स्वीकृति मांगी है। निगरानी ब्यूरो की ओर से इसके लिए तीन बार पत्र भेजा गया है। पहले 27 जून, दो और 27 अगस्त को भी निगरानी ने पत्र भेजा। अब 11 सितंबर को फिर से निगरानी ने पत्र भेजा है। हालांकि अबतक इसे निर्गत नहीं किया गया है।
सरकार को लिखा है पत्र
निगरानीके अपर पुलिस महानिदेशक नीरज सिन्हा ने 11 सितंबर को सुमंत तिवारी के खिलाफ सरकार को पत्र लिखा है। स्वास्थ्य सचिव बीके त्रिपाठी को लिखे पत्र में एडीजी ने कहा है कि पूर्व ड्रग इंस्पेक्टर कोल्हान प्रमंडल वर्तमान में उप निदेशक सुमंत कुमार तिवारी को अपना बयान देने के लिए निगरानी ब्यूरो में उपस्थित होने