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मतगणना के बाद स्थिति साफ होगी

7 वर्ष पहले
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प्रत्याशी पर फैसला सही : रावत

भाजपाके प्रदेश प्रभारी त्रिवेंद्र सिंह रावत ने गुरुवार को पार्टी कार्यालय में कहा कि पार्टी ने काफी सोच समझ कर हर सीट पर प्रत्याशी का चयन किया है। मतगणना के बाद सब कुछ साफ हो जाएगा। उन्होंने कहा कि झारखंड की जनता भी गठबंधन की सरकार से उब चुकी है। वह स्थिर सरकार चाहती है। उनसे झारखंड में होनेवाले विस चुनाव को लेकर संवाददाता सम्मेलन में पूछे गए सवाल और उनके जवाब के प्रमुखअंश :

जब टिकट देने में कार्यकर्ताओं के सामाजिक-राजनीतिक कार्यों को महत्व दिया गया, तो फिर अनंत प्रताप देव, जेबी तुबिद सरीखे नेता आए और टिकट लेकर कैसे चल दिए? आप नहीं मानते कि इससे निष्ठावान कार्यकर्ताओं की उपेक्षा हुई।

जिन्हेंटिकट दिया गया है, उन्होंने भी बीजेपी की सदस्यता ली है। मैं कहूंगा कि 23 दिसंबर को मतगणना की प्रतीक्षा करनी चाहिए। उस दिन पता चल जाएगा कि पार्टी ने सही फैसला किया था।

भाजपाकहती रही है कि गठबंधन ने इस राज्य का सत्यानाश किया। अब खुद आजसू के साथ गठबंधन कर लिया? गठबंधन की सरकार से राज्य का कैसे भला होगा?

परिस्थितिके अनुसार कभी-कभी बड़े हित के लिए छोटे समझौते करने पड़ते हैं। लंबा सोचकर निर्णय लिया गया है। पिछले चुनाव में हमने जदयू को 18 सीटें दी थीं। इस बार हमने अभी आजसू को छह सीटें दी हैं।

तोक्या मान लिया जाए कि भाजपा आजसू को छह सीटें ही देगी।

पार्टीविचार कर रही है। देखिए क्या होता है।

पार्टीके भी कार्यकर्ता आरोप लगा रहे हैं कि आजसू के साथ समझौते में एक औद्योगिक घराने की भूमिका रही। परिमल नथवानी ने इसमें मध्यस्थ की भूमिका निभाई।

इसपर कुछ नहीं कहूंगा। (थोड़ा ठहर कर) यह 100 फीसदी गलत जानकारी है।

14साल की सरकार में नौ साल भाजपा भी सत्ता में रही। फिर झारखंड के पिछड़ेपन के लिए क्या भाजपा भी दोषी है!

अबदेश विकास चाहता है। इसके लिए लोग अब केंद्र और राज्य में एक ही विचारधारा और पार्टी की सरकार चाहते हैं।

लातेहारमें नारायण गंझू को टिकट देने की गलती कैसे हुई?

अंतिमसमय में नारायण गंझू का नाम एक केस में डाल दिया गया। प्रशासन ने जानबूझ कर ऐसा पार्टी को परेशान करने के लिए किया।

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