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समाज में सद्‌भाव के लिए नफरत नहीं, प्रेम को जगह दें : इंद्रेश

6 वर्ष पहले
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जबानमें मिठास हो, तो झगड़े और फसाद ही नहीं हों। वहीं परस्पर सद्‌भाव के लिए हमें अपनी मानसिकता में नफरत नहीं, प्रेम को जगह देनी होगी। आपसी द्वेष विवाद की वजह धर्म और संप्रदाय कभी नहीं होते। यदि ऐसा होता तो, बेटे-बाप में, भाई-भाई में कभी झगड़े नहीं होते। पति-प|ी के बीच तलाक नहीं होते। ये बातें राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के कार्यकारी मंडल के सदस्य इंद्रेश कुमार ने सोमवार को रांची में कहीं। वह रिम्स ऑडोटोरियम में राज्य अल्पसंख्यक आयोग द्वारा आयोजित पैगाम-ए-इंसानियत कार्यक्रम में बोल रहे थे। मौके पर पूर्व सीएम अर्जुन मुंडा, सांसद रामटहल चौधरी, विधायक जीतूचरण राम, मेयर आशा लकड़ा और छत्तीसगढ़ राज्य वक्फ बोर्ड के अध्यक्ष सलीम अशरफी समेत सभी धर्म समाज के गणमान्य लोग मौजूद थे।

इंद्रेश कुमार ने कहा कि कोई भी धर्म आपस में बैर रखना नहीं सिखाता। घृणा की मानसिकता ही विवाद का कारण बनती है। उन्होंने कहा कि जरूरत दृष्टिकोण में बदलाव लाने की है। इस मौके पर विकास भारती के सचिव अशोक भगत ने सामाजिक एकता के अपने अनुभवों को साझा किया।

अस्वथथ होने के कारण केंद्रीय अल्पसंख्यक कल्याण मंत्री नजमा हेपतुल्ला कार्यक्रम में शिरकत नहीं कर सकीं। उनके भेजे लिखित संदेश को एदार-ए-शरीया के नाजिम आला मौलाना कुतुबुद्दीन रिजवी ने पढ़कर सुनाया। इसमें हेपतुल्ला ने मौलाना अबुल कलाम आजाद के रांची में गुजारे नजरबंदी के दिनों को याद करते हुए उनके सामाजिक सद्भावपूर्ण कार्यों की चर्चा की।

धर्म प्रतिनिधियों ने दिया आपसी प्रेम पर बल

कार्यक्रमको संबोधित करते हुए उलेमा बोर्ड के मौलाना असगर मिसबाही ने कहा कि इस्लाम इंसानियत का पाठ पढ़ाता है। कार्डिनल के प्रतिनिधि फादर सुशील टोप्पो ने कहा कि धर्मनिरपेक्षता हमारी पहचान है। पटना साहिब से आए शैलेंद्र सिंह ने कहा कि मिलजुल कर देश का विकास करेंगे। कार्यक्रम का संचालन शहनवाज कुरैशी धन्यवाद ज्ञापन याकूब अंसारी ने किया।

गांव-गांव पहुंचे इंसानियत का संदेश : लुईस मरांडी

अल्पसंख्यककल्याण मंत्री डॉ. लुईस मरांडी ने कार्यक्रम की प्रशंसा करते हुए कहा कि इंसानियत के संदेश को गांव-गांव तक पहुंचाने की जरूरत है। एदारा-ए-शरीया और सिख समाज के प्रतिनिधिमंडल ने उन्हें अलग-अलग मांग पत्र सौंपा। इसपर मंत्री ने कहा कि किसी भी समाज को किसी भी सरकरी सुविधा से वंचित नहीं किया जाएगा।

सभी धर्म देते हैं अमन-चैन का पैगाम : सीपी

नगरविकास मंत्री सीपी सिंह ने कहा कि सभी धर्म अमन-चैन का पैगाम देते हैं। लेकिन इसके बावजूद हम सभी धर्म के नाम पर लड़ते हैं। इसपर सोचने की जरूरत है। हमने महापुरुषों को भी जातियों में बांट दिया है। जाति के अलावा गोत्र के लिए भी विवाद है। हम कहां जा रहे हैं। उन्होंने व्यवहार में इंसानियत लाने पर बल दिया।

एकता के लिए काम करने वाले सम्मानित हों : शाहिद

आयोगके अध्यक्ष शाहिद अख्तर ने कहा कि हम किसी भी धर्म को माननेवाले हों, पर हमारी पहचान भारतीयता है। उन्होंने सरकार को सुझाव दिया कि पैगाम-ए-इंसानियत नामक कमेटी बने। जिसका काम सद्भाव बनाए रखना हो। वहीं एकता के लिए काम करने वाले लोगों को स्वतंत्रता दिवस और गणतंत्र दिवस पर सम्मानित किया जाए।

कार्यक्रम में इंद्रेश कुमार ने विवाद से बचने के लिए मानसिकता बदलने पर दिया जोर।

अलग-अलग धर्मों समाज के सभी वर्गों के लोग थे मौजूद।