सीधी बात
जलमीनार परिसर को बना दिया पार्किंग जोन
हरमूजलागार में पिछले साल बड़ी घटना होने के बावजूद जलागार और संपों की सुरक्षा को लेकर पेयजल विभाग गंभीर नहीं हुआ है। पीएमयू डोरंडा परिसर स्थित जलमीनार संप की सुरक्षा रात को भगवान भरोसे ही होती है। रात आठ बजे के बाद यहां ऑटो अन्य वाहनों की अवैध रूप से पार्किंग होती है। आसपास के फुटपाथी दुकानदार अपना सामान रखते हैं। देर रात तक यहां अड्डेबाजी चलती रहती है। और, यह सब इस परिसर की सुरक्षा करने वाले चौकीदार लक्ष्मण सिंह की मर्जी से होता है। उसका अस्थाई आवास इसी परिसर में है। परिसर का हाल जानने के लिए जब भास्कर की टीम रात को वहां पहुंची, तो चौकीदार और उसके परिवार वाले रिपोर्टर और फोटो जर्नलिस्ट से उलझ गए। कैमरा छीनने का प्रयास भी किया।
पार्किंग के लिए देनी होती है राशि
अहम सवाल
{अगरअड्डेबाजी के चक्कर में मारपीट हो और कोई जलमीनार या पानी में कुछ मिला दे, तो इसकी जिम्मेवारी कौन लेगा?
{आखिरकार कोई अफसर अभियंता रात में निरीक्षण क्यों नहीं करता है?
{चौकीदार को इतनी छूट किसने दी, क्या इसमें अभियंता की मिलीभगत है?
वर्षों से परिसर में हो रही है पार्किंग
पीएमयू कार्यालय से शाम होते ही सभी अफसर और अभियंता चले जाते हैं। इसके बाद चौकीदार ऑटो अन्य वाहनों को कैंपस में पार्क करवाता है। इतना ही नहीं डोरंडा मार्केट के फुटपाथ में लगनेवाली दुकानों के सामान भी परिसर, कार्यालय जलमीनार के कार्यालयों में रखवाता है। सभी कार्यालय की चाभी इसी चौकीदार के पास रहती है। यह सिलसिला वर्षों से चल रहा है।
पाइपलाइन पर दुकानों के सामान रखे जाते हैं।
क्या टेंपो लगवाना है आपको : चौकीदार
जैसे ही भास्कर टीम ने परिसर में प्रवेश किया, चौकीदार ने रोक दिया। रिपोर्टर से पूछा क्या टेंपो लगाना है। रिपोर्टर ने पूछा हां, कितना पैसा लगेगा। एक दिन का 50 रुपए। जब उसने छायाकार को देखा, तो पूरा परिवार वहां धमका और कैमरा छीनने का प्रयास किया। चौकीदार ने रिपोर्टर को कहा, आपकाे यहां का पता किसने दिया। यहां कोई गलत काम नहीं हो रहा है। साहब लोग को सब मालूम है।
वाहन पार्क के लिए चौकीदार हर ऑटो फुटपाथ दुकानदारों से मासिक डेली राशि लेता है। उसकी प्रतिदिन की कमाई 5 हजार रुपए से अधिक है। कार्यालय में देर रात तक चौकीदार के साथ चालक महफिल जमाए रहते हैं।
परिसर की सुरक्षा की