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इनपुट : अनिमेषनचिकेता

7 वर्ष पहले
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राज्य में परिवहन का मुख्य जरिया सड़क मार्ग है और उसकी भी हालत पतली है

रांची। नाग जाति भारत की प्राचीन एवं प्रभुत्व संपन्न जाति रही है। महावंश एवं प्राचीन दक्षिण भारत के अभिलेखों में भी नागों का उल्लेख मिलता है। बेनी राम महथा और घासी राम द्वारा तैयार नाग वंशावली, जो भारत के तत्कालीन गवर्नर जनरल लार्ड कार्नवालिस को सुपुर्द की गई थी, उसमें नागवंशी राजाओं के संबंध में कई महत्वपूर्ण जानकारियां मिलती हैं। जब नागवंशी महाराजा ने इस छोटानागपुर क्षेत्र में राज स्थापित किया, उस समय यहां सबसे ज्यादा आबादी आदिवासियों की थी। ब्राह्मण, क्षत्रिय आदि भी इस क्षेत्र में रहते थे। पूरब में पंचेत और दक्षिण में क्योंझर राज्य था। नागवंश के प्रथम महाराजा फणि मुकुट राय का विवाह पंचेत राज के गोवंशी शिखर क्षत्रियों के राजा के यहां हुआ था। आक्रमणकारी क्योंझर राज्य को उन्होंने पंचेत राज्य की सहायता से पराजित किया था। कोरांबे, बरवे आदि स्थानों तक सरगुजा के रक्सेल राजाओं का अधिकार था। फणि मुकुट राय ने उन्हें भी अपना आधिपत्य स्वीकार कराया। आदिवासियों से उनका गहरा लगाव था, इसलिए कहा जाता है कि नागवंशियों की छोटानागपुर में सैन्य विजय नहीं बल्कि सांस्कृतिक विजय हुई थी। नागवंशियों के प्रथम राजा महाराज फणिमुकुट राय 16 साल की उम्र में गद्दी पर बैठे और 64 साल तक यहां राज किया। इस राजघराने का किला रातू गढ़ के नाम से जाना जाता है। जब राजा आए राजनीति में कॉलम में रातू राजघराने पर पढ़ें सतीशकुमार कीरिपोर्ट।