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कल झाविमो मनाएगा काला दिवस

6 वर्ष पहले
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झारखंडविकास मोर्चा में विधायकों की बगावत के बाद पार्टी सुप्रीमो बाबूलाल मरांडी ने चार विधायक नवीन जायसवाल, अमर बाऊरी, गणेश गंझू आलोक चौरसिया को पार्टी से निलंबित कर दिया है। इस आशय का पत्र पार्टी द्वारा विधानसभा अध्यक्ष को भेज दिया गया है। इधर बाबूलाल मरांडी ने इस घटनाक्रम के बाद 10 फरवरी को राज्यपाल से मिलने का निर्णय लिया है। राज्यपाल से मिलकर रघुवर दास के सीएम बनने से लेकर अब तक हु़ई राजनीतिक घटनाक्रम के जांच कराने की मांग की जाएगी। साथ ही राष्ट्रपति से यह मांग की जाएगी कि ऐसा कानून बने कि जो विधायक जीतने के बाद किसी अन्य दल शामिल नहीं हो सकें 11 फरवरी को राज्यभर में झाविमो काला दिवस मनाएगा। उल्लेखनीय है कि सोमवार को हुई बैठक में केवल दो विधायक प्रदीप यादव प्रकाश राम ही शामिल हुए।

झाविमो की बैठक में बाबूलाल, प्रदीप यादव अन्य।

मरांडी ने प्रदीप यादव, प्रकाश राम सहित रंधीर सिंह जानकी यादव के पार्टी के साथ होने का दावा किया है। मरांडी ने कहा कि दोनों विधायक रंधीर जानकी से बात हुई है। इसलिए चार को पार्टी से निलंबित किया है।

झाविमो के चार विधायक नवीन जायसवाल, अमर बाऊरी, गणेश गंझू आलोक कुमार चौरसिया के दिल्ली में कूच कर जाने की सूचना है। हालांकि इसकी अभी तक पुष्टि नहीं हो पाई है।

झाविमो छोड़ चुके पार्टी के पूर्व महासचिव प्रवीण सिंह ने कहा है कि जब चार विधायकों को निलंबित किया गया, तो दो अन्य विधायकों पर निलंबन की कार्रवाई क्यों नहीं की गई। यदि यह पार्टी अनुशासनहीनता है, तो जो शामिल नहीं हुए, पार्टी से निष्कासित कर देना चाहिए।

संगठन मंत्री की अहम भूिमका

झाविमोविधायकों को भाजपा से जोड़ने में प्रदेश समंठन मंत्री राजेंद्र सिंह ने सूत्रधार की भूमिका निभाई। रणनीित को सफल बनाने में उन्होंने पूरा सहयोग किया। पिछले दस दिनों से सिंह गांव में थे। सूत्रों के अनुसार वहां पर झाविमो कांग्रेस के विधायकों के साथ उनकी बातचीत हुई। भाजपा में आने के लिए विधायकों को मनाने में सफल रहे। सीएम भी झाविमो विधायकों के लगातार संपर्क में रहे। शनिवार को पूरा होमवर्क करने के बाद सीएम दिल्ली गए। जहां वे केंद्रीय नेताओं की सहमति के बाद झावमो विधायकों से मिले सोमवार को लौटे।

झाविमो का विलय होने पर स्थिति

81विधानसभा वाले झारखंड में पूर्ण बहुमत के लिए 41 विधायकों की जरूरत है। सत्ता पक्ष के पास 42 विधायक (भाजपा 37 और आजसू 5) हैं, जबकि विपक्ष में 39 विधायक। झाविमो के छह विधायकों ने भाजपा में विलय कर लिया, तो सत्ता पक्ष की संख्या 48 हो जाएगी और विपक्ष 33 के आंकड़ों में सिमट जाएगा। झाविमो के विलय के बाद यदि आजसू ने सरकार का साथ छोड़ भी दिया तब भी भाजपा विधायकों की संख्या 43 रहेगी, जो स्पष्ट बहुमत से ज्यादा है।

विधायकों की वर्तमान स्थिति

सत्ता पक्ष

भाजपा37

आजसू 05

कुल 42

विपक्ष

झामुमो19

झाविमो 08

कांगेस 06

बसपा 01

माले 01

मासस 01

अन्य 03

कुल 39

कुलविधायकों की संख्या 81

झाविमो सुप्रीमो बाबूलाल मरांडी ने कहा कि भाजपा केंद्र में और राज्य में सत्ता में आने के बाद बौरा गई है। लगता है कि जो जनादेश उसे प्राप्त हुआ है, उससे संतुष्ट नहीं है। इसलिए दूसरे दलों को लाकर सरकार को मजबूती प्रदान करना चाहती है। यही खेल उसने चुनाव के पूर्व भी किया। विधायकों की खरीद-फरोख्त जनादेश का अपमान है। भाजपा चाहती है कि वह पैसे के बल पर वह सबकुछ खरीद सकती है। गुंडागर्दी पर उतर आई है। उन्होंने झामुमो के साथ मिलकर आंदोलन करने के सवाल पर कहा कि किसी एक मुद्दे पर तो विपक्ष एक है। इसमें गलत क्या है। उन्होंने प्रवीण सिंह को अपना दोस्त बताया।