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- जर्जर खटारा बसों में ढोए जा रहे हैं संत थॉमस स्कूल के बच्चे
जर्जर खटारा बसों में ढोए जा रहे हैं संत थॉमस स्कूल के बच्चे
स्कूलीबच्चों की सुरक्षा को लेकर झारखंड हाईकोर्ट से लेकर सुप्रीम कोर्ट तक गंभीर है। लेकिन, संत थॉमस स्कूल को छोटे बच्चों की जान की कोई परवाह नहीं है। स्कूल के बच्चों को ऐसी पुरानी और कंडम बसों से ढोया जा रहा है, जिसमें सुरक्षा के कोई इंतजाम नहीं हंै।
जबकि कोर्ट का सख्त आदेश है कि बच्चों को वैसी बसों में कदापि नहीं बैठाएं, जिसमें सुरक्षा मानकों का ख्याल नहीं रखा जाता है। बच्चों की जान के साथ कैसे खिलवाड़ किया जा रहा है, इसकी पड़ताल भास्कर ने की।
यह है कोर्ट का निर्देश
कोर्टका निर्देश है कि स्कूल बसों का रंग पीले कलर में होना चाहिए। बस पर स्कूल का नाम, स्कूल का फोन नंबर, चालक और खलासी का नंबर लिखा होना चाहिए। चालक के ड्राइविंग लाइसेंस पर उसकी वैधता लिखी होनी चाहिए। बस की खिड़कियों पर लोहे की जाली लगी होनी चाहिए। सुरक्षा के लिए फायर इंस्टीविशर और फर्स्ट एड बॉक्स होना जरूरी है। जबकि इन बसों में इस तरह की गिनी-चुनी सुविधा ही है।
खटरा बसों से कम लागत में होती है मोटी कमाई
स्कूलप्रबंधन खटारा बसों का उपयोग इसलिए कर रहा है कि इसमें कम लागत में ज्यादा कमाई होती है। एक एक बच्चे से 500 से 1000 रुपए तक भाड़ा वसूले जाते हैं। जबकि टाटा 407 में 30 से 40 बच्चों को ठूंस-ठूंस कर बैठाया जाता है। एक बस से कम-से-कम 12 से 14 हजार रुपए प्रतिमाह की कमाई हो जाती है।
पश्चिम बंगाल की बसें
संतथॉमस स्कूल के बच्चों को ढोने के लिए जितनी भी टाटा 407 स्कूल बसों का उपयोग किया जा रहा है, उसमें से किसी पर स्कूल का नाम नहीं लिखा है। ये सभी बसें बिना नाम के चल रही हैं। नियमानुसार, सभी बसों पर संबंधित स्कूल का नाम लिखा होना जरूरी है। इन बसों में कई ऐसी हैं, जो पश्चिम बंगाल और बिहार के रजिस्ट्रेशन नंबर से चल रही हैं।
^बच्चों की जिंदगी से कोई भी स्कूल प्रबंधन खिलवाड़ नहीं कर सकता। अगर कोई स्कूल इस तरह कर रहा है, तो इसकी निश्चित रूप से जांच की जाएगी। पकड़े जाने पर नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी। हर स्कूल को कोर्ट के निर्देश का पालन करना अनिवार्य है।\\\'\\\' -नागेंद्रपासवान, जिलापरिवहन पदाधिकारी, रांची
टाटा 407 पर ढोए
जा रहे हैं सैकड़ों बच्चे
स्कूलके छोटे बच्चों को खटारा टाटा 407 बस से ढोया जा रहा है। ऐसी करीब आठ बसों में सैकड़ों बच्चों को स्कूल से लाने-लेजाने का काम लिया जा रहा है। ये बसें सुरक्षा के किसी भी मानक को पूरा नहीं करतीं। इन बसों की खिड़कियों में तो जाली लगी है और ही लोहे के गार्ड रॉड। इतना ही नहीं कई बसों में तो खिड़कियों में शीशे तक नहीं हैं। इन बसों में छोटे बच्चों को ठूंस-ठूंस कर बैठाया जाता है। इससे कभी भी बच्चे खिड़की से गिर सकते हैं।
टाटा 407 बस में बैठने जाते संत थॉमस स्कूल के बच्चे।
{कोर्ट का आदेश, बच्चों को असुरक्षित बसों में नहीं बैठाएं