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40 साल पुराने इन्फ्रास्ट्रक्चर पर टिकी है शहरी जलापूर्ति
झारखंडगठन के बाद शहरी आबादी को शुद्ध पेयजल उपलब्ध कराने के लिए कई योजनाएं बनीं। लेकिन, कोई भी धरातल पर नहीं उतर सकी। इसी के तहत सरकार ने राजधानी में वर्ष 2042 तक की आबादी को ध्यान में रख पेयजल की दीर्घकालीन योजना पर 2011 में काम शुरू किया था। नगर विकास पेयजल विभाग ने मिलकर इस दिशा में पहल की थी। सरकार ने एकरा एजेंसी से सर्वे भी कराया। बड़ी-बड़ी कंपनियों का प्रजेंटेशन भी हुआ। लेकिन, 2014 आते-आते यह काम ठंडे बस्ते में चला गया।
आबादी बढ़ने की रफ्तार पानी की जरूरतों पर गौर करें तो अगले 50 वर्षों में राजधानी के लोगों को भरपूर पानी पिलाने के लिए करीब 100 एमजीडी पानी की आवश्यकता होगी। वर्तमान में शहरी जलापूर्ति 40-50 साल पुराने इन्फ्रास्ट्रक्चर पर टिकी है। तब रांची के हर घर में कुआं होता था। सप्लाई वाटर नहीं के बराबर इस्तेमाल होता था। मगर आज शहर की 80 फीसदी आबादी सप्लाई वाटर पर निर्भर है।
हटिया डैम : 1962में एचईसी सिंचाई विभाग ने मिलकर बनवाया था। पूर्व में इससे केवल प्लांट एचईसी आवासी कॉलोनी को जलापूर्ति होती थी। बाद में अन्य क्षेत्र में जलापूर्ति के लिए पीएचईडी ने इसे हैंडओवर कर लिया।
गोंदाडैम : डीवीसीसिंचाई विभाग के प्रयास से गोंदा डैम का निर्माण वर्ष 1956 में हुआ था। यहां से कांके रोड आसपास क्षेत्रों में जलापूर्ति होती है।
गेतलसूद(रुक्का) : सिकिदरीमें बिजली उत्पादन जलापूर्ति के लिए इसे 1970 में बनाया गया था। बड़े इलाके में यहां से जलापूर्ति की जाती है।
योजना के प्रति सरकार गंभीर
^एकराकी रिपोर्ट पर सरकार गंभीर है। रिपोर्ट के आधार पर जल्द ही कदम बढ़ाएंगे, ताकि लोगों को पर्याप्त शुद्ध पेयजल मुहैया कराया जा सके। इस मुद्दे पर नगर विकास सिंचाई विभाग से बात कर रहा हूं।’’ चंद्रप्रकाशचौधरी, मंत्री, पीएचईडी
यह थी योजना
सरकारने पीपीपी मोड पर रांची के लोगों को 24/7 के आधार पर जलापूर्ति मुहैया कराने की योजना बनाई थी। इसमें जिक्र था कि साल 2042 तक रांची को कितने पानी की जरूरत होगी। योजना तैयार करने के लिए निजी एजेंसी एकरा को 35 लाख रुपए में काम सौंपा गया। एजेंसी ने सर्वे कर सरकार को रिपोर्ट भी सौंप दी। पर इसके बाद बात आगे नहीं बढ़ी।
अरबनमिशन में देरी से नहीं बढ़ी बात
विभागीयअधिकारियों के अनुसार पुरानी जलापूर्ति योजना के साथ अरबन मिशन को जोड़कर भविष्य के लिए जलापूर्ति की योजना बननी थी। मगर अरबन मिशन जलापूर्ति योजना में देरी के कारण बात आगे नहीं बढ़ पाई।
{ वर्ष 2011 की जनगणना के अनुसार रांची शहरी क्षेत्र की आबादी 11 लाख आंकी गई है। अगर इसमें रिंग रोड के इर्द-गिर्द के इलाके नए अंचल जोड़ दिए जाएं, तो रांची शहर की आबादी 15 लाख के आस-पास हो जाएगी।
{ अगर 10 सालों में शहर की आबादी पांच लाख (मौजूदा) की दर से बढ़ती रही, तो वर्ष 2050 तक रांची शहर की आबादी 25 लाख को पार कर सकती है।
{ नेशनल अरबन रेगुलेशन के तहत हर व्यक्ति को प्रतिदिन 135 लीटर पानी चाहिए
{ इस हिसाब से 15 लाख की आबादी को अभी 203 मिलियन लीटर यानी 45 एमजीडी पानी चाहिए।
{ अभी तीनों डैम (रुक्का-30 एमजीडी, हटिया-12 एमजीडी गोंदा चार एमजीडी) से लगभग 40 से 45 एमजीडी पानी की आपूर्ति हो रही है। जो वर्तमान आबादी के हिसाब से पर्याप्त है।
{ इस हिसाब से 2050 तक कम से कम 45 से 50 एमजीडी पानी की अतिरिक्त आवश्यकता होगी। अब इतना पानी कहां से आएगा, यह चिंता का विषय है।
{ हालांकि रुक्का डैम में अरबन मिशन के तहत 4 लाख नई आबादी को जोड़ने के लिए 25 एमजीडी क्षमता का नया ट्रीटमेंट प्लांट बनाया जा रहा है मगर बारिश की बेरुखी के कारण डैम का पानी पर्याप्त होगा, यह नहीं कहा जा सकता।